Legal Trouble for IPS Ajay Pal Sharma: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के बीच, यूपी कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को लेकर कानूनी और राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा दक्षिण 24 परगना जिले में ‘पुलिस ऑब्जर्वर’ नियुक्त किए गए शर्मा को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने चुनाव आयोग की जरूरी निष्पक्षता को ताक पर रख दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में आधी रात को हलचल
पश्चिम बंगाल में वोटिंग से ठीक पहले मंगलवार देर रात यह रिट याचिका ई-फाइल की गई। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए मांग की है कि अजय पाल शर्मा को तुरंत बंगाल से वापस भेजा जाए। याचिका में तर्क दिया गया है कि अजय पाल शर्मा की मौजूदगी चुनावी माहौल को खराब कर रही है, जिससे 2026 के विधानसभा चुनाव की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कम हो सकता है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई है।
कौन हैं आईपीएस अजय पाल शर्मा?
अजय पाल शर्मा 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में तैनात हैं। वह यूपी में अपनी सख्त कार्यशैली और कई एनकाउंटर्स के कारण ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘यूपी के सिंघम’ के नाम से मशहूर हैं। बंगाल चुनाव के लिए उन्हें दक्षिण 24 परगना के चार विधानसभा क्षेत्रों की निगरानी का जिम्मा दिया गया है। उनकी इसी ‘दबंग’ छवि को लेकर विपक्षी दलों ने उन पर सवाल उठाए हैं।
फालता में टीएमसी प्रत्याशी के साथ विवाद
अजय पाल शर्मा की तैनाती के बाद से ही विवादों का सिलसिला शुरू हो गया था। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह फालता विधानसभा क्षेत्र के टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के घर के बाहर उनके परिवार को चेतावनी देते नजर आए। शर्मा ने कहा था कि अगर मतदाताओं को डराने की शिकायतें मिलीं, तो वह “उचित इलाज” करेंगे। इस घटना के बाद टीएमसी ने उन पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया। टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान ने पलटवार करते हुए कहा, “अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं, मैं झुकूंगा नहीं।”
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दखल से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में भी उठा था। हालांकि, हाईकोर्ट ने चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के खिलाफ कोई भी आदेश देने से फिलहाल इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि मतदान की प्रक्रिया जारी रहने तक वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी। वहीं, चुनाव आयोग ने शर्मा की तैनाती का बचाव करते हुए कहा है कि वे केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। फिलहाल, आज 142 सीटों पर मतदान जारी है और सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।
