उत्तर भारत में ‘हीटवेव’ का कहर: स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की नई एडवाइजरी, जानें हीट स्ट्रोक से बचने के उपाय

“उत्तर भारत में पारा 42°C के पार! भीषण गर्मी और लू (Heatwave) से बचने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्त एडवाइजरी जारी की है। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और ‘हीट डोम’ के खतरे के बीच दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें। जानें क्या खाएं, क्या न पिएं और कैसे रखें खुद को सुरक्षित।

उत्तर भारत में 'हीटवेव' का कहर: स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की नई एडवाइजरी (Image ChatGPT)
उत्तर भारत में 'हीटवेव' का कहर: स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की नई एडवाइजरी (Image ChatGPT)

उत्तर भारत में बढ़ती गर्मी और चढ़ते तापमान ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। मौसम में तेजी से बदलाव के साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। कई राज्यों में पारा 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच चुका है, जिससे लू का असर अब साफ तौर पर महसूस होने लगा है। ऐसे हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकार ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और हीटवेव से बचाव के लिए नई एडवाइजरी जारी की गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, इस समय उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है, जिसके कारण हीट स्ट्रोक, हीट एग्जॉशन, डिहाइड्रेशन, हीट क्रैम्प्स और घमौरियों जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके अलावा इस मौसम में फूड पॉइजनिंग, टायफाइड, चिकनपॉक्स और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी अधिक रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में शरीर में पानी की कमी और तेज धूप के संपर्क से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए बचाव बेहद जरूरी है।

बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हीटवेव से बचाव और हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। इसके साथ ही राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र और जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय कार्यक्रम ने भी चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ते तापमान के कारण हीटवेव का प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है, जिससे शरीर में पानी की कमी और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

एडवाइजरी में लोगों को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ पीने, हल्के और ढीले कपड़े पहनने और दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच धूप में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही घर को ठंडा रखने और बच्चों तथा पालतू जानवरों को बंद गाड़ियों में अकेला न छोड़ने पर जोर दिया गया है।

स्वास्थ्य एजेंसियों ने यह भी कहा है कि तेज धूप में नंगे पैर चलने से बचें और शराब, चाय, कॉफी व अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों का सेवन कम करें, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा दोपहर के समय भारी काम या कसरत करने से बचने और लंबे समय तक धूप में रहने से परहेज करने की सलाह दी गई है।

सरकार ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और खुले में काम करने वाले मजदूरों को ज्यादा सतर्क रहने को कहा है, क्योंकि इन पर गर्मी का असर सबसे अधिक पड़ता है। स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने के लिए प्रेरित करने और कार्यस्थलों पर ठंडे स्थान, पीने के पानी और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मजदूरों को काम के बीच-बीच में आराम देने, छायादार स्थान उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर काम की गति कम करने की सलाह भी दी गई है।

भीषण गर्मी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ बैठक कर विभिन्न मॉडलों की समीक्षा भी की है। इस दौरान राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पुडुचेरी द्वारा अपनाए गए उपायों को प्रभावी बताया गया और विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि इन मॉडलों को देशभर में लागू किया जाए, जिससे हीटवेव के कारण होने वाली मौतों को कम किया जा सके।

इस बीच, राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हीट स्ट्रोक वार्ड शुरू किया गया है। वार्ड के इंचार्ज डॉ. अजय चौहान के अनुसार, यहां मरीजों के इलाज के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और प्राथमिक उपचार के लिए विशेष बेड भी रिजर्व रखे गए हैं। हालांकि अभी तक कोई गंभीर मरीज सामने नहीं आया है, लेकिन आने वाले दिनों को देखते हुए पूरी तैयारी रखी गई है।

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के डॉ. मनीष अग्रवाल का कहना है कि फिलहाल हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या कम है, लेकिन तापमान बढ़ने के साथ इसमें इजाफा हो सकता है। वहीं सर गंगा राम अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. एम वली ने ‘हीट डोम’ की स्थिति को लेकर चेतावनी दी है, जिसमें घनी इमारतों वाले इलाकों में गर्मी अधिक बढ़ जाती है और लोगों के बीमार होने का खतरा ज्यादा हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में हरी सब्जियां, फल और जूस का अधिक सेवन करना चाहिए, ताकि शरीर में पानी की मात्रा बनी रहे और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचा जा सके। कुल मिलाकर, बढ़ती गर्मी को देखते हुए सतर्कता और सावधानी ही इस समय सबसे बड़ा बचाव है।

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