नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा पर अब उनकी पूर्व पार्टी ने खुलकर हमला बोला है। सोमवार को आप नेता सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी छोड़ने के बजाय साजिश रचने का रास्ता चुना। सौरभ भारद्वाज के बयान के बाद दिल्ली की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
सौरभ भारद्वाज ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर आज आपकी शादी हो पाई है, तो वह इसलिए क्योंकि पार्टी ने आपको राज्यसभा का सदस्य बनाया। वरना कोई आपको पूछता भी नहीं।” उन्होंने कहा कि राघव चड्ढा को पार्टी छोड़ने का पूरा अधिकार था, लेकिन जिस तरीके से उन्होंने काम किया, वह गलत था। भारद्वाज ने कहा, “आप पार्टी छोड़ सकते थे, लेकिन आपने साजिश रचने का विकल्प चुना। चाहे आप कितने भी गुस्से में हों, ऐसा नहीं करना चाहिए था।”
Response to Raghav’s Video
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) April 27, 2026
Raghav Chaddha says his changing party is like someone switching a job from one company to another.
Though it’s not the same but even when people switch jobs, they don’t hatch conspiracy against their parent company
For more than a year, Raghav… pic.twitter.com/RxfnTsv9Ms
राघव चड्ढा द्वारा पार्टी बदलने की तुलना नौकरी बदलने से किए जाने पर भी सौरभ भारद्वाज ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि नौकरी बदलना और राजनीतिक दल बदलना दोनों अलग बातें हैं। किसी कंपनी में काम करने का विचारधारा से संबंध नहीं होता, लेकिन कोई व्यक्ति राजनीतिक पार्टी उसकी विचारधारा के आधार पर चुनता है और उसी सोच के साथ आगे बढ़ता है।
आप नेता ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा पिछले एक साल से ज्यादा समय से बीजेपी के साथ मिलकर काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान एक रणनीति के तहत राघव की ऐसी छवि बनाई जा रही थी, जिसमें वे मिडिल क्लास के मुद्दे उठाने वाले युवा नेता के तौर पर सामने आएं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एयरपोर्ट वेंडर्स, मोबाइल रिचार्ज और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जैसे जिन मुद्दों को राघव चड्ढा ने उठाया, वे सोची-समझी योजना का हिस्सा थे। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार इन मुद्दों को आगे बढ़ाती थी ताकि राघव उन्हें उठाएं, उनकी लोकप्रियता बढ़े और उनकी एक न्यूट्रल छवि तैयार की जा सके।
राघव चड्ढा के बीजेपी में जाने के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से यह अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक हमला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
