द्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा अब नहीं रहे, मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

पंडित मिश्रा ठुमरी, खयाल, भजन, दादरा, कजरी और चैती में माहिर थे। उनकी गायकी को लोग आज भी याद करते हैं। उनके कुछ प्रसिद्ध गीतों में ‘खेले मसाने में होरी दिगंबर’, ‘सेजिया से सैयां’ और ‘बरसन लागी बदरिया’ शामिल हैं।

Padma Vibhushan Pandit Chhannulal Mishra Passes Away
Padma Vibhushan Pandit Chhannulal Mishra Passes Away

बनारस संगीत घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा अब इस दुनिया में नहीं रहे। 89 वर्ष की उम्र में उन्होंने मिर्जापुर में अपनी बेटी के घर अंतिम सांस ली। उनके बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी और मणिकर्णिका घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान कई मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।

पंडित छन्नूलाल मिश्रा ने खयाल और ठुमरी शैली के शास्त्रीय गायन को नई ऊंचाई तक पहुँचाया। वे 6 साल की उम्र से ही संगीत सीखने लगे थे। उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद एक प्रसिद्ध तबला वादक थे। पिता बद्री प्रसाद मिश्रा से उन्होंने संगीत की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्हें किराना घराने के उस्ताद अब्दुल गनी खान और ठाकुर जयदेव सिंह से प्रशिक्षण मिला।

पंडित मिश्रा ठुमरी, खयाल, भजन, दादरा, कजरी और चैती में माहिर थे। उनकी गायकी को लोग आज भी याद करते हैं। उनके कुछ प्रसिद्ध गीतों में ‘खेले मसाने में होरी दिगंबर’, ‘सेजिया से सैयां’ और ‘बरसन लागी बदरिया’ शामिल हैं। बॉलीवुड में भी उन्होंने अपनी आवाज दी; फिल्म ‘आरक्षण’ के गाने ‘सांस अलबेली’ और ‘कौन सी डोर’ आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं।

पंडित मिश्रा ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी अपने संगीत का जादू बिखेरा। अमेरिका के कई शहरों में उन्होंने प्रस्तुति दी और भारत की संस्कृति को विश्व में फैलाया। उनके निधन से संगीत जगत में अपूरणीय क्षति हुई है।

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