आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए राजनीतिक गलियारों से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर आम आदमी पार्टी का दामन छोड़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ थाम लिया है। पार्टी के तीन प्रमुख चेहरों का एक साथ जाना अरविंद केजरीवाल के लिए एक जबरदस्त झटके के रूप में देखा जा रहा है। केजरीवाल ने इस कदम को पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात करार दिया है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम पर अन्ना हजारे की प्रतिक्रिया ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने इस मामले पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने और निर्णय लेने का अधिकार है। अन्ना हजारे ने जोर देकर कहा कि अगर इन नेताओं ने पार्टी छोड़ी है, तो निश्चित रूप से उन्हें अंदरूनी तौर पर कोई न कोई बड़ी तकलीफ रही होगी। उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ‘आप’ ने सही रास्ता अपनाया होता, तो आज ये हालात पैदा नहीं होते। अन्ना का इशारा साफ तौर पर अरविंद केजरीवाल की ओर था, जहाँ उन्होंने बार-बार दोहराया कि पार्टी का नेतृत्व सही दिशा में नहीं गया, जिसकी वजह से यह नाता टूटा है।
बीजेपी की सदस्यता लेने से ठीक पहले राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने दिल्ली में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान चड्ढा ने एक सनसनीखेज दावा किया कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के करीब दो-तिहाई सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर फिलहाल तीन सांसदों ने ही बीजेपी ज्वाइन की है, लेकिन उनके इस दावे ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।
आम आदमी पार्टी के लिए यह संकट इसलिए भी गंभीर है क्योंकि 2012 में गठित हुई इस पार्टी ने महज 14 वर्षों के भीतर दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में अपनी सत्ता स्थापित कर ली थी। वर्तमान में पंजाब में पार्टी की सरकार है, लेकिन राज्यसभा में 10 में से 7 सांसदों के टूटने की खबरों और खुद पार्टी की वैचारिक नींव रखने वाले अन्ना हजारे द्वारा नेतृत्व की आलोचना किए जाने के बाद, पार्टी के भविष्य और साख पर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं।
