वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश अंबेडकर ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने की घटना पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राघव चड्ढा द्वारा दिए गए तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए इसे महज एक ‘कानूनी कल्पना’ करार दिया है। अंबेडकर का मानना है कि विधायिका में दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन के आधार पर किया गया यह तथाकथित विलय संवैधानिक रूप से दो दलों के वास्तविक मिलन को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब वह समय आ गया है जब देश के दल-बदल विरोधी कानून के मौजूदा ढांचे पर फिर से विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि इसकी अलग-अलग व्याख्याएं करके इसका रणनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा है।
प्रकाश अंबेडकर ने तकनीकी बारीकियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत जो प्रावधान हैं, वे केवल एक निश्चित संख्या के आधार पर विधायकों या सांसदों को अयोग्य होने से बचाते हैं। इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों का एक समूह पाला बदल ले, तो पूरी राजनीतिक पार्टी का अस्तित्व ही दूसरी पार्टी में विलीन हो गया है। उनके अनुसार, किसी भी वैध विलय के लिए केवल विधायी दल का निर्णय पर्याप्त नहीं हो सकता। असली विलय तब माना जाना चाहिए जब वह संपूर्ण राजनीतिक दल के स्तर पर हो, जिसमें राष्ट्रीय, राज्य, जिला और स्थानीय स्तर की सभी संगठनात्मक इकाइयां शामिल हों।
Raghav Chadha is conveniently referring to the so-called “legal fiction” of merger based solely on the support of two-thirds of the members in legislature, which fails to establish a genuine merger of two parties in the constitutional sense.
— Prakash Ambedkar (@Prksh_Ambedkar) April 24, 2026
The anti-defection provision under… https://t.co/CHsDCBtt2U
उन्होंने आगे तर्क दिया कि राजनीतिक दल केवल चुने हुए प्रतिनिधियों का समूह नहीं, बल्कि एक संरचित संस्था होते हैं। इसलिए किसी भी कानूनी विलय के लिए पार्टी के संविधान के अनुसार फैसला लिया जाना चाहिए और संगठन के सभी सक्षम निकायों द्वारा उसे अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है। राघव चड्ढा के इस दावे पर कि यह संविधान सम्मत विलय है, अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि सांसदों का यह कदम केवल एक तकनीकी बचाव है, न कि राजनीतिक दलों का वास्तविक एकीकरण। गौरतलब है कि राघव चड्ढा ने सात सांसदों के हस्ताक्षर वाला दस्तावेज राज्यसभा अध्यक्ष को सौंपकर इसे भाजपा में विलय बताया है, जिस पर अब संवैधानिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।
