गुवाहाटी: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुयान सरमा के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणियों के मामले में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा की गिरफ्तारी की संभावना काफी बढ़ गई है।
क्या हैं आरोप?
यह पूरा मामला असम विधानसभा चुनाव से पहले पवन खेड़ा द्वारा की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है। खेड़ा ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुयान सरमा के पास संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र और एंटीगुआ-बारबुडा के तीन अलग-अलग पासपोर्ट हैं। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया था कि उनकी दुबई में अघोषित संपत्तियां और शेल कंपनियों में हिस्सेदारी है। इन आरोपों को लेकर रिंकी शर्मा ने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में खेड़ा के खिलाफ धोखाधड़ी, मानहानि और दस्तावेजों की जालसाजी समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया था।
सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगा है जवाब
पवन खेड़ा के लिए कानूनी पेच तब और उलझ गया जब सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल को उन्हें मिली एक हफ्ते की ट्रांजिट बेल पर रोक लगा दी। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने असम सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए खेड़ा को नोटिस जारी किया है और तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि खेड़ा असम में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन अब हाई कोर्ट से अर्जी खारिज होने के बाद उनके पास विकल्प सीमित हो गए हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया था कि रिंकी भुयान सरमा ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विदेशी पासपोर्ट और संपत्तियां हासिल की हैं। इन तीखे आरोपों के बाद मामला कानूनी विवाद में तब्दील हो गया और रिंकी शर्मा ने इसे जानबूझकर किया गया अपमान और आपराधिक साजिश करार दिया। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक करते हुए जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया गया है। फिलहाल, इस मामले में खेड़ा की अगली कानूनी रणनीति पर सबकी नजरें टिकी हैं।
