इस्लामाबाद/मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की अगुवाई वाली पाकिस्तानी सेना नागरिकों पर गोलियां बरसा रही है, लेकिन इसके बावजूद विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे। इस नागरिक विद्रोह के बीच अवामी एक्शन कमेटी (AAC) के वरिष्ठ नेता शौकत नवाज मीर ने उग्र भाषण देते हुए पाकिस्तानी सरकार और सेना की तुलना “लोगों को मारने वाली डायन” से की। उन्होंने कहा कि ‘आजाद कश्मीर’ असल में स्वतंत्र नहीं है, बल्कि दशकों से दमन और शोषण की जकड़ में है।
मीर ने हजारों प्रदर्शनकारियों से कहा, “हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से है। यह जनता का संघर्ष है, यह हम सबका संघर्ष है और जब तक न्याय व अधिकार नहीं मिलते, हम पीछे नहीं हटेंगे।” उनका यह बयान उस वक्त आया है जब नागरिक समाज अनिश्चितकालीन हड़ताल और प्रदर्शन के तीसरे दिन पर है। अब तक पाकिस्तानी फौज की गोलीबारी में कम से कम 12 नागरिकों की मौत और 200 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। वहीं पुलिस बल पर भी हमले हुए, जिनमें तीन पुलिसकर्मी मारे गए और नौ घायल बताए जा रहे हैं।
ACC नेता ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी खुद वही अत्याचार कर रहे हैं, जिनका वे दूसरों पर इल्ज़ाम लगाते हैं। उन्होंने आसिम मुनीर के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने हिंदुओं को ‘काफिर’ कहा था, और पलटवार करते हुए कहा कि पाक सेना के हाथ खुद कश्मीरियों के खून से सने हुए हैं।
शुरुआत में यह आंदोलन बिजली बिलों और खाद्य संकट के खिलाफ था, लेकिन अब यह सरकार और सेना की नीतियों के खिलाफ व्यापक विद्रोह में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, दशकों की उपेक्षा और राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखने का आरोप लगाया है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि PoK में यह आंदोलन ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि पहली बार नारों का सीधा निशाना इस्लामाबाद और पाक सेना पर है। शौकत नवाज मीर ने ऐलान किया कि “यह संघर्ष आखिरी सांस तक जारी रहेगा। अब PoK के लोग जुल्म के आगे नहीं झुकेंगे।”
इस बीच अवामी एक्शन कमेटी का ‘लॉन्ग मार्च’ भी गुरुवार को जारी रहेगा। वहीं पाकिस्तानी प्रशासन ने इंटरनेट और संचार सेवाओं पर रोक लगा दी है। मीडिया में भी इस विद्रोह की कवरेज सीमित रखी जा रही है।
स्थिति यह संकेत दे रही है कि पाकिस्तान को अब अपने कब्जे वाले कश्मीर से ही बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जहां जनता खुलेआम सरकार और सेना को उत्पीड़क करार दे रही है।
