भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान को एक बार फिर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। रक्षा मंत्री ने दोटूक शब्दों में कहा है कि आतंकवाद के संरक्षकों और मानवता के दुश्मनों तक अब भारत से होकर जाने वाली सिंधु नदी का पानी किसी भी कीमत पर नहीं पहुंचने दिया जाएगा। उन्होंने साफ तौर पर रेखांकित किया कि भारत शांति की भाषा न समझने वालों को उनकी ही भाषा में कड़ा जवाब देना बहुत अच्छे से जानता है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच दशकों पुराना ‘सिंधु जल-बंटवारा समझौता’ व्यावहारिक रूप से पूरी तरह निलंबित ही रहेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में आयोजित एक ‘बुद्धिजीवी सम्मेलन’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस महत्वपूर्ण मंच से बोलते हुए उन्होंने भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा ‘सिंधु जल संधि’ (IWT) को निलंबित किए जाने के ऐतिहासिक फैसले का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत सरकार ने पूरी दुनिया को अपनी इच्छाशक्ति दिखा दी है और यह साबित कर दिया है कि जो ताकतें शांति, सुरक्षा और आपसी सद्भाव की भाषा नहीं समझतीं, उनसे कैसे निपटा जाता है।
पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भावुक और कड़े लहजे में कहा कि इस कायराना हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करके भारत ने वैश्विक मंच पर यह कड़ा संदेश दिया था कि जिन आतंकी हरकतों के कारण हमारे देश के बेकसूर नागरिकों के आंसू नहीं सूख रहे हैं, उन ताकतों को हमसे पानी की उम्मीद बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। हम सिंधु नदी के जल को आतंकवादियों और उनके आकाओं तक नहीं पहुंचने देंगे। रक्षा मंत्री का यह तीखा बयान असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस पुरानी और ऐतिहासिक घोषणा का पुनरावलोकन है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा था कि देश के नागरिकों का खून और नदियों का पानी दोनों एक साथ नहीं बह सकते।
गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली की विभिन्न नदियों के जल-उपयोग और बंटवारे को लेकर 19 सितंबर, 1960 को ऐतिहासिक ‘सिंधु जल संधि’ (Indus Waters Treaty) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे दुनिया के सबसे टिकाऊ समझौतों में गिना जाता था। हालांकि, पिछले वर्ष पहलगाम में हुए बड़े आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार ने अपने रुख में अभूतपूर्व और कड़ा बदलाव किया है। अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में प्राप्त अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए, भारत ने इस संधि को तब तक के लिए पूरी तरह स्थगित कर दिया है, जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से भारत के खिलाफ होने वाली आतंकी गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त नहीं कर देता।
पहलगाम हमले के बाद से नई दिल्ली का यह बिल्कुल साफ और अडिग संदेश रहा है कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय संधि या समझौता जमीनी हकीकत, इंसानी जानों और देश की आंतरिक सुरक्षा से अलग रहकर या ऊपर होकर काम नहीं कर सकता। भारत का स्पष्ट मानना है कि जब तक पाकिस्तान इस “असामान्य शत्रुता” और आतंकी नेटवर्क को नेस्तनाबूद नहीं करता, तब तक यह जल-बंटवारा समझौता व्यावहारिक रूप से ठंडे बस्ते में ही रहेगा।
इस बुद्धिजीवी सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले 12 वर्षों के दौरान केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार की कई प्रमुख और ऐतिहासिक उपलब्धियों का भी देश के सामने लेखा-जोखा रखा। उन्होंने मुख्य विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि एक समय था जब कांग्रेस पार्टी के नेता दावों के साथ कहते थे कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को दुनिया की कोई ताकत समाप्त नहीं कर सकती। लेकिन देश की जनता साक्षी है कि हमारी राष्ट्रवादी सरकार ने दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के बल पर इसे कितनी आसानी और शांतिपूर्ण ढंग से हमेशा के लिए समाप्त कर दिया।
उन्होंने कश्मीर के बदलते हालातों पर गर्व व्यक्त करते हुए आगे कहा कि जो कश्मीर कभी केवल आतंकवाद, पत्थरबाजी और अलगाववाद के लिए जाना जाता था, आज वही कश्मीर विकास की मुख्यधारा से जुड़कर पर्यटन, विदेशी निवेश और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों में भारी वृद्धि देख रहा है। आज श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर पूरी शान से भारत का तिरंगा फहरा रहा है, वहां आजादी के बाद पहली बार बड़े पैमाने पर कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है, मुहर्रम के पारंपरिक जुलूस बिना किसी हिंसा के शांतिपूर्ण ढंग से निकाले जा रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि घाटी में दशकों से खौफ के साए में बंद पड़े सिनेमा हॉल अब फिर से गुलजार हो रहे हैं और वहां फिल्में चल रही हैं।
