क्षेत्रीय संघर्ष में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल अमेरिका पर सीधे हमले से ज्यादा खतरनाक: पेंटागन

पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारी एलब्रिज कोल्बी ने क्षेत्रीय संघर्ष में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय युद्ध में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल तेजी से बड़े और बेकाबू संकट में बदल सकता है। चीन और पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को देखते हुए इस चेतावनी का भारत के लिए भी खास महत्व है।

पेंटागन परमाणु चेतावनी
पेंटागन परमाणु चेतावनी

वॉशिंगटन: पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि किसी क्षेत्रीय संघर्ष में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल और उससे पैदा होने वाला बड़ा तनाव, अमेरिका पर अचानक होने वाले किसी बड़े हमले से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। ‘2026 यूनाइटेड स्टेट्स स्ट्रैटेजिक कमांड डेटरेंस सिम्पोजियम’ के दौरान पॉलिसी के लिए रक्षा मामलों के अंडर सेक्रेटरी एलब्रिज कोल्बी ने यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका पर बड़े पैमाने पर परमाणु हमले के नतीजे ऐसे होंगे जो हमले में सक्षम देशों को रोक कर रखेंगे, लेकिन क्षेत्रीय युद्ध का खतरा इससे कहीं अधिक चिंताजनक है।

कोल्बी ने इस खतरे की व्याख्या करते हुए कहा कि एक तरह के स्थानीय और पारंपरिक युद्ध में अगर गलती से परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हो जाता है, तो वह स्थिति फैलते-फैलते बेहद गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे संकट के समय फैसला लेने का समय बहुत कम होता है, जहाँ एक पक्ष किसी साधारण सैन्य कदम को भी पूर्ण हमले की तैयारी समझकर अनुमान से कहीं अधिक बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इससे बेहद तेजी से तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो सकती है, जो अमेरिका के हित में बिल्कुल नहीं होगी।

अमेरिका को किसी बेकाबू हालात में फँसे बिना दुश्मनों को रोकने के लिए राष्ट्रपति के समक्ष भरोसेमंद और तर्कसंगत विकल्प रखने होंगे। कोल्बी ने कहा कि इससे राष्ट्रपति के विकल्प सीमित नहीं हो रहे, बल्कि और अधिक मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी सेना के लिए परमाणु प्रतिरोध क्षमता (न्यूक्लियर डेटरेंस) के आधुनिकीकरण को सबसे महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने एक ऐसे विविधतापूर्ण ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ की आवश्यकता पर बल दिया जो हमले के बाद भी बचा रह सके, सुरक्षित ‘सेकंड-स्ट्राइक’ बल दे सके और पारंपरिक बलों के साथ मिलकर रणनीति बना सके। फिलहाल प्रशासन नया ‘न्यूक्लियर पोस्चर रिव्यू’ करने के बजाय परमाणु इस्तेमाल से जुड़े दिशानिर्देशों की समीक्षा और आधुनिकीकरण को लागू करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

यह स्थिति भारत के लिए भी एक बड़ी खतरे की घंटी है, क्योंकि भारत के दो पड़ोसी और मुख्य प्रतिद्वंद्वी देश—चीन और पाकिस्तान—परमाणु हथियारों से लैस हैं। भारत के लिए दो मोर्चों पर परमाणु युद्ध का जोखिम हमेशा बना रहता है। चीन अमेरिका की बराबरी करने की होड़ में अपने परमाणु जखीरे को लगातार बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के परमाणु हथियार बेहद अस्थिर हाथों में होने के कारण पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

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