नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने मंगलवार, 18 अगस्त को की है। सत्येंद्र जैन ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अक्टूबर 2024 में जमानत पर तिहाड़ जेल से बाहर आए थे, जहां वे आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में करीब 18 महीने बंद रहे थे। जमानत मिलने के लगभग 22 महीने बाद यह नई गिरफ्तारी दिल्ली जल बोर्ड (डीजबोर्ड) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) टेंडर से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में हुई है।
1,500 करोड़ से अधिक का टेंडर घोटाला और FIR
एसीबी की प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह नया मामला 11 मई 2024 को दर्ज एफआईआर नंबर 10/2024 के तहत है। यह कार्रवाई दिल्ली सरकार के विजिलेंस डायरेक्टोरेट की शिकायत पर की गई है। एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 7, 7ए, 9 और 13 तथा आईपीसी की धारा 420, 409, 418 और 120-बी के तहत दर्ज है।
आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के अपग्रेडेशन टेंडर की शर्तों में जानबूझकर हेराफेरी की गई ताकि ‘यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी को सीधा फायदा पहुंचाया जा सके। जांच में सामने आया कि टेंडर से पहले जरूरी पायलट स्टडी नहीं कराई गई, ट्रीटेड पानी की गुणवत्ता से जुड़े मानकों को हटा दिया गया और तकनीकी शर्तों में फेरबदल कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
छह लोग गिरफ्तार, रिश्वत के लेनदेन का खुलासा
एसीबी ने इस मामले में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है:
- सत्येंद्र जैन (पूर्व जल मंत्री)
- उदित प्रकाश राय (पूर्व सीईओ, दिल्ली जल बोर्ड / आईएएस अधिकारी)
- अंकित श्रीवास्तव (तत्कालीन कॉन्ट्रैक्ट कंसल्टेंट)
- नागेंद्र यादव (मालिक, एएन एंटरप्राइजेज)
- राजा कुमार कुर्रा (मालिक, यूरोटेक एनवायरनमेंट)
- पंकज वर्मा (मालिक, श्रीजनहार)
जांच एजेंसी के अनुसार, रिश्वत की रकम एएन एंटरप्राइजेज और श्रीजनहार जैसी बिचौलिया कंपनियों के जरिए आगे भेजी गई। आरोपी पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके परिजनों के बैंक खातों में यूरोटेक कंपनी से बिचौलिया कंपनियों के रास्ते करीब 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत बैंकिंग चैनल के जरिए पहुंची, जिसका इस्तेमाल संपत्ति खरीदने में किया गया था।
2021 से 2026 तक टेंडर प्रक्रिया की टाइमलाइन और व्हाट्सएप चैट
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस आईएफएएस (IFAS) टेंडर प्रक्रिया की शुरुआत 7 अक्टूबर 2021 को हुई थी। 14 अक्टूबर 2021 को तत्कालीन जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के अपग्रेडेशन प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद 21 और 23 दिसंबर 2021 को सत्येंद्र जैन, उदित प्रकाश राय और अंकित श्रीवास्तव की बैठकों में ‘फिक्स्ड मीडिया आईएफएएस’ तकनीक को फाइनल किया गया।
28 दिसंबर 2021 को एस.सी. वशिष्ठ के प्रस्ताव के आधार पर, जिसे अजय गुप्ता और उदित प्रकाश राय के जरिए भेजा गया था, टेंडर की अनुमानित लागत 1,546.32 करोड़ रुपये तय की गई। इसका उद्देश्य प्लांट की क्षमता 215 एमजीडी से बढ़ाकर 297 एमजीडी करना था।
डिजिटल सबूतों और व्हाट्सएप चैट से खुलासा हुआ है कि आधिकारिक रूप से टेंडर जारी होने से पहले ही गोपनीय शर्तें और ड्राफ्ट दस्तावेज आरोपियों के फोन पर शेयर किए जा रहे थे। 17 मई 2022 को टेंडर की तकनीकी बिड खोली गई और 30 मई 2022 को आगे की प्रक्रिया हुई। गौर करने वाली बात है कि 30 मई 2022 को ही सत्येंद्र जैन को ईडी ने एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि टेंडर के मुख्य फैसले अक्टूबर से दिसंबर 2021 के बीच ही ले लिए गए थे, जब जैन मंत्री पद पर थे।
पुराना मामला भी है जुड़ा
सीबीआई ने अगस्त 2017 में सत्येंद्र जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) का मामला दर्ज किया था और दिसंबर 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी। इसी मामले में ईडी ने अप्रैल 2022 में 4.81 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की थी। बाद में सितंबर 2025 में 7.44 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्ति अटैच किए जाने के बाद कुल अटैचमेंट 12.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। दिसंबर 2024 में सीबीआई को इस मामले में प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन (मुकदमा चलाने की मंजूरी) भी मिल गई थी।
