गाजियाबाद: दक्षिण अफ्रीका के कुछ देशों में इबोला वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए गाजियाबाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ वर्चुअल बैठक आयोजित की।
बैठक में इबोला वायरस के शुरुआती लक्षणों की पहचान, संक्रमण की रोकथाम और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। हालांकि फिलहाल जिले के अस्पतालों में अलग वॉर्ड बनाने या कोई विशेष गाइडलाइन जारी करने का फैसला नहीं लिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), जिला सर्विलांस अधिकारी, चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों ने हिस्सा लिया। एमएमजी हॉस्पिटल के फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन भी बैठक में मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्वास्थ्य कर्मियों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध मरीज की समय रहते पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान इबोला वायरस रोग (EVD) के संक्रमण को फैलने से रोकने, अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करने और मरीजों के इलाज के दौरान सुरक्षा उपायों का पालन करने पर विशेष जोर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण नियंत्रण और सतर्कता से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, इबोला वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण की तरह हो सकते हैं, लेकिन समय रहते पहचान बेहद जरूरी है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, दस्त, शरीर में तेज दर्द और गंभीर मामलों में रक्तस्राव शामिल हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और लापरवाही न बरतें।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल गाजियाबाद के अस्पतालों में इबोला वायरस के लिए अलग से कोई वॉर्ड नहीं बनाया गया है और न ही नई गाइडलाइन जारी की गई है। हालांकि विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त इंतजाम किए जाएंगे।
विभाग ने लोगों से अफवाहों से बचने और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है।
