वैशाली/हाजीपुर। उत्तर प्रदेश की पीसीएस अधिकारी ज्योति मौर्य और उनके पति आलोक मौर्य जैसा ही एक हाई-प्रोफाइल विवाद अब बिहार के वैशाली जिले से सामने आया है। हाजीपुर नगर थाना क्षेत्र का यह पूरा मामला पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते और एक कथित प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ है। बिदुपुर थाना क्षेत्र के माइल पंचायत (वार्ड संख्या १३) के रहने वाले छियालीस वर्षीय अमन कुमार ने अपनी पत्नी और बीपीएससी (BPSC) शिक्षिका गुंजन कुमारी पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। अमन का दावा है कि अपनी पत्नी को उच्च शिक्षा दिलाने और सरकारी नौकरी के काबिल बनाने के लिए उन्होंने अपनी पैतृक जमीन तक बेच दी, लेकिन नौकरी मिलते ही पत्नी ने उन्हें और उनके दस वर्षीय मासूम बेटे को बेसहारा छोड़ दिया।
अमन कुमार के अनुसार, उनका विवाह साल २०१३ में हाजीपुर नगर थाना क्षेत्र के लोदीपुर गांव के निवासी देवेंद्र सिंह की बेटी गुंजन कुमारी के साथ हुआ था। शादी के बाद दोनों के घर एक बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम आरुष आर्या है और उसकी उम्र इस समय दस वर्ष है। अमन ने बताया कि शादी के वक्त उनकी पत्नी सिर्फ इंटरमीडिएट पास थीं, लेकिन आगे बढ़कर एक शिक्षिका के रूप में अपना करियर बनाना चाहती थीं। पीड़ित पति का कहना है कि उनकी खुद की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और वे मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी पत्नी की पढ़ाई के आड़े कभी गरीबी को नहीं आने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए साल २०२२ में उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति के हिस्से की डेढ़ कट्ठा जमीन तक बेच दी थी, ताकि गुंजन बिना किसी आर्थिक तंगी के आगे पढ़ सके। इसी पैसे के दम पर गुंजन ने अपना ग्रेजुएशन और बीएड (B.Ed.) पूरा किया और फिर बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी में जुट गईं।
बीपीएससी में चयन होते ही बदलने लगे रिश्ते
अमन कुमार ने बताया कि कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार गुंजन कुमारी का चयन बीपीएससी टीआरई-०२ (TRE-02) परीक्षा के जरिए कक्षा छह से आठवीं के लिए शिक्षिका के रूप में हो गया। चयन के बाद गुंजन को प्रशिक्षण के लिए सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज भेजा गया, और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उनकी पोस्टिंग वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड के यूएमएस मोहनपुर धर्मपुर विद्यालय में की गई। अमन का आरोप है कि इसी ट्रेनिंग और पोस्टिंग के दौरान उनकी पत्नी की नजदीकियां उसके पुराने कॉलेज मित्र प्रेम प्रकाश जयवाल से बहुत ज्यादा बढ़ गईं। उन्होंने दावा किया कि ये दोनों कॉलेज के समय से ही एक-दूसरे के संपर्क में थे और ट्रेनिंग के दौरान चोरी-छिपे मिलने भी लगे थे।
अमन ने बताया कि सुपौल में रहने के दौरान उनके बेटे ने उन्हें खुद जानकारी दी थी कि “प्रेम प्रकाश अंकल” अक्सर उनके घर आते थे और कई दिनों तक वहीं रुकते थे। पीड़ित पति का कहना है कि जब उन्होंने पत्नी के इस अवैध संबंध का कड़ा विरोध किया, तो पत्नी ने उनके साथ रहने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनवरी २०२५ में गुंजन ने दार्जिलिंग घूमने जाने के बहाने बेटे को उनके पास भेज दिया था, लेकिन बाद में जब पता चला कि स्कूल की अन्य शिक्षिकाएं दार्जिलिंग गई ही नहीं थीं, तो उनका शक यकीन में बदल गया कि पत्नी अपने कथित प्रेमी के साथ ही बाहर गई थी।
किराए के मकान में पहुंचने पर बढ़ा विवाद
अमन कुमार का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से उनकी पत्नी उनसे पूरी तरह अलग रह रही है और उन्हें फंसाने के लिए उन पर कई तरह के झूठे आरोप लगाकर कानूनी केस भी दर्ज करा चुकी है। वर्तमान में वह अपने बेटे के साथ अकेले रह रहे हैं और बेटे के भविष्य तथा पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उसे एक हॉस्टल में दाखिल करा दिया है। अमन को जानकारी मिली थी कि उनकी पत्नी हाजीपुर के लिच्छवि नगर स्थित एक किराए के मकान में रह रही है और वहाँ प्रेम प्रकाश का लगातार आना-जाना बना रहता है।
आरोप के मुताबिक, 23 मई को जब अमन अचानक उस किराए के मकान पर पहुंचे, तो उन्होंने अपनी पत्नी और प्रेम प्रकाश को आपत्तिजनक स्थिति में देखा। इसके बाद उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बाहर से दरवाजा बंद कर दिया और तुरंत आपातकालीन पुलिस सेवा डायल 112 को इसकी सूचना दी। पीड़ित पति का कहना है कि पुलिस के पहुंचने में थोड़ी देर हुई, जिस बीच हंगामा सुनकर स्थानीय लोग और मकान मालिक मौके पर जमा हो गए और दरवाजा खुलवाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया, हालांकि उनका दावा है कि उनके पास इस पूरी घटना से संबंधित पुख्ता वीडियो फुटेज मौजूद हैं।
मासूम बेटे ने भी अपनी मां पर लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे पारिवारिक और कूटनीतिक विवाद में अब दंपति के दस वर्षीय बेटे आयुष आर्य ने भी अपनी मां के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। बच्चे का कहना है कि उसकी मां उसे जबरन उस पराए व्यक्ति को “मामा” कहकर बुलाने के लिए दबाव डालती थी, और जब भी वह ऐसा करने से इनकार या विरोध करता था, तो उसके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती थी। बच्चे ने मीडिया के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अब किसी भी कीमत पर अपनी मां के साथ नहीं रहना चाहता और अपने पिता के पास ही खुश है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में इस अजीबोगरीब मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, हालांकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि फिलहाल यह पूरा मामला पति द्वारा लगाए गए वन-साइड आरोपों और दावों पर ही आधारित है और जांच के बाद ही सच सामने आएगा।
क्या था उत्तर प्रदेश का चर्चित ज्योति मौर्य विवाद?
गौरतलब है कि साल २०२३ में उत्तर प्रदेश की पीसीएस अधिकारी ज्योति मौर्य का मामला पूरे देश के सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया था। ज्योति मौर्य उत्तर प्रदेश में एसडीएम (SDM) पद पर तैनात एक सम्मानित अधिकारी हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब उनके पति आलोक मौर्य, जो पंचायती राज विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं, ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी तंगहाली के बावजूद ज्योति को पढ़ा-लिखाकर अफसर बनाया, लेकिन नौकरी लगते ही ज्योति ने उन्हें छोड़ दिया और एक अन्य व्यक्ति के साथ संबंध बना लिए।
आलोक मौर्य ने पत्नी की पढ़ाई के लिए किए गए अपने संघर्षों और आर्थिक मदद के कई दावे किए थे, जिसके बाद दोनों के बीच का यह वैवाहिक विवाद कोर्ट और थानों तक पहुंच गया था। इस मामले ने सोशल मीडिया पर इसलिए भी एक विकृत रूप ले लिया था क्योंकि समाज के एक वर्ग ने इसे “पत्नी को पढ़ाने का यही अंजाम होता है” जैसी रूढ़िवादी बहस से जोड़कर महिलाओं की शिक्षा के खिलाफ एक नकारात्मक नैरेटिव बनाना शुरू कर दिया था, जबकि बुद्धिजीवियों ने इसे केवल दो लोगों का निजी वैवाहिक विवाद माना था। हालांकि, अब करीब ढाई साल तक चले इस लंबे और कड़वे विवाद का सुखद अंत हो चुका है, और ज्योति मौर्य तथा आलोक मौर्य ने अपने सभी पुराने आपसी मतभेदों और मुकदमों को भुलाकर आपसी सहमति से दोबारा एक साथ रहने का फैसला कर लिया है।
