NEET Paper Leak Exposed: 3 मई की शाम करीब 6 बजे देशभर के 22 लाख से ज्यादा छात्र NEET-UG 2026 की परीक्षा देकर अपने-अपने घरों और हॉस्टलों की ओर लौट चुके थे। मेडिकल कॉलेज में दाखिले का सपना लिए छात्रों ने घंटों तक परीक्षा केंद्रों में बैठकर ओएमआर शीट के गोले काले किए थे। राजस्थान के कोचिंग हब सीकर में भी परीक्षा के बाद सामान्य माहौल था। लेकिन इसी शाम एक साधारण सी दिखने वाली PDF फाइल ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पीछे छिपे कथित पेपर लीक का पर्दाफाश कर दिया।
सीकर में केमिस्ट्री पढ़ाने वाले शिक्षक शशिकांत सुथार पूरे दिन की थकान के बाद अपने कमरे पर लौटे थे। उन्होंने सालभर छात्रों को मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करवाई थी और परीक्षा के बाद आंसर-की तैयार करने में भी मदद की थी। वह आराम करने ही जा रहे थे कि उनके मकान मालिक ने बेहद सामान्य अंदाज में कहा कि मोबाइल पर एक PDF घूम रही है, जरा उसे देख लीजिए।
शुरुआत में यह एक आम वायरल फाइल जैसी लगी, लेकिन जैसे ही शशिकांत सुथार ने PDF खोली, उनके चेहरे के भाव बदल गए। उन्होंने एक बार सवाल देखे, फिर दोबारा ध्यान से मिलान किया। कुछ ही पलों में उन्हें एहसास हो गया कि मामला बेहद गंभीर हो सकता है। उन्होंने तुरंत अपने एक साथी शिक्षक को फोन किया। इसके बाद दोनों ने पूरी रात जागकर उस PDF में मौजूद सवालों का असली NEET-UG प्रश्नपत्र से लाइन-दर-लाइन मिलान किया।
सुबह होते-होते दोनों इस निष्कर्ष पर पहुंच चुके थे कि वायरल PDF और असली प्रश्नपत्र के कई सवाल हूबहू मेल खा रहे हैं। यहीं से शुरू हुई उस लड़ाई की कहानी जिसने बाद में पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
शशिकांत सुथार पिछले 13 वर्षों से सीकर में छात्रों को मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करवा रहे हैं। जब उन्हें इस कथित पेपर लीक के संकेत मिले, तो उन्होंने इसे नजरअंदाज करने के बजाय कार्रवाई का फैसला किया। 4 मई को वह सबूतों के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे, लेकिन शुरुआती स्तर पर उनसे और पुख्ता प्रमाण लाने को कहा गया। इसके बाद उन्होंने दोबारा दस्तावेजों की जांच की और कथित लीक से जुड़े सबूतों को व्यवस्थित रूप से तैयार किया।
6 मई को उन्होंने सीधे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को ईमेल भेजा और साथ ही देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) को भी पूरे मामले की जानकारी और सबूत सौंपे।
मामले ने 7 मई को बड़ा मोड़ लिया, जब खुद NTA की ओर से प्रतिक्रिया आई और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिक्षक से संपर्क किया। धीरे-धीरे मामला राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर होता गया और आखिरकार 12 मई को NTA को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा। एजेंसी ने पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के आरोपों के बाद यह बड़ा कदम उठाया।
जब शशिकांत सुथार से पूछा गया कि उन्होंने इतना बड़ा जोखिम क्यों उठाया, तो उनका जवाब बेहद भावुक था। उन्होंने कहा कि सीकर में देश के अलग-अलग हिस्सों से गरीब और मजदूर परिवारों के बच्चे डॉक्टर बनने का सपना लेकर आते हैं। कई परिवार जमीन गिरवी रखकर या कर्ज लेकर बच्चों की कोचिंग फीस भरते हैं। ऐसे में अगर मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ बेईमानी होती है, तो यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं रह जाता, बल्कि लाखों सपनों के टूटने जैसा होता है।
उन्होंने कहा कि उनका मकसद केवल ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों के भविष्य को बचाना था। एक साधारण सी PDF से शुरू हुई यह कहानी अब देश की सबसे बड़ी परीक्षा व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रही है। वहीं, एक शिक्षक की सतर्कता और साहस ने लाखों छात्रों को न्याय की उम्मीद भी दी है।
