वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के मध्य बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार (28 जुलाई) को वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। दोनों शीर्ष नेताओं के बीच एक विस्तृत बैठक हुई, जिसमें जारी सैन्य संघर्ष सहित कई महत्वपूर्ण रणनीतिक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि इस वार्ता के दौरान इजरायली पीएम ने ट्रंप के साथ कुछ ऐसी गोपनीय सामरिक जानकारियां साझा की हैं, जो तेहरान की चिंताएं बढ़ा सकती हैं।
नए ठिकानों को निशाना बनाने की तैयारी
इजरायल के ‘चैनल 12’ द्वारा जारी रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि नेतन्याहू का मानना है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए ईरान के विरुद्ध एक बार फिर आक्रामक सैन्य कदम उठाना ही अंतिम विकल्प है। इजरायल इस बार उन बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है, जिन्हें पिछले हमलों में भारी नुकसान पहुंचने के बाद ईरान ने दोबारा तैयार कर लिया है। इसके अतिरिक्त, उन ठिकानों पर भी कार्रवाई करने की रणनीति है, जिन्हें अब तक की सैन्य कार्रवाइयों में बख्श दिया गया था।
अमेरिका पर दबाव न बनाने का रुख
रिपोर्ट में अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल ने केवल अपना सामरिक आकलन अमेरिकी प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया है और वाशिंगटन पर किसी नए हमले के लिए दबाव नहीं डाला है। उनके अनुसार, अमेरिका पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जा सकता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं शीघ्र ही इस विषय पर स्वतंत्र निर्णय लेंगे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर असर
दूसरी तरफ, अमेरिका-ईरान संघर्ष की वजह से दुनिया के कई देश प्रभावित हो रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन बाधित हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल आया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बनी इस अनिश्चितता को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए रूस से तेल की खरीदारी को बढ़ा दिया है।
