India AI Impact Summit 2026: दिल्ली के भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान विरोध प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की पेशी के दौरान कोर्ट में दिल्ली पुलिस और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। दिल्ली पुलिस ने जहां इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश को बदनाम करने की साजिश बताया है, वहीं आरोपियों के वकील ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।
दिल्ली पुलिस का तर्क: ‘देश विरोधी नारे और पुलिस पर हमला’
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने सख्त लहजा अपनाते हुए कहा कि यह किसी भी तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने न केवल भारतीय प्रधानमंत्री बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ भी अपमानजनक और देश विरोधी नारे लगाए। पुलिस ने आरोप लगाया कि जब इन लोगों को रोकने की कोशिश की गई, तो उन्होंने ड्यूटी पर तैनात तीन पुलिस अधिकारियों को घायल कर दिया।
पुलिस ने कोर्ट से कस्टडी की मांग करते हुए कहा कि हमें यह जांच करनी है कि अलग-अलग राज्यों के ये लोग एक साथ कैसे इकट्ठा हुए और क्या इस प्रदर्शन के पीछे कोई विदेशी फंडिंग या बड़ी साजिश है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन बरामद करने और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के साथ उनका आमना-सामना कराने की आवश्यकता भी जताई।
बचाव पक्ष की दलील: ‘विपक्षी होने के कारण बनाया निशाना’
दूसरी ओर, आरोपियों के वकील ने जमानत याचिका पेश करते हुए कहा कि इन युवाओं को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे एक विपक्षी पार्टी से जुड़े हैं। वकील ने दावा किया कि यह एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था जिसे दबाने के लिए पुलिस ने उनके मुवक्किलों की बुरी तरह पिटाई की।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि ये युवा हैं और इनका भविष्य है, केवल राजनीतिक असहमति के आधार पर इनके करियर को बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। वकील ने कस्टडी का विरोध करते हुए कहा कि विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है और इसे इस तरह नहीं कुचला जा सकता।
7 साल की सजा का प्रावधान
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान कृष्ण हरि, कुंदन यादव, अजय कुमार और नरसिंह यादव के रूप में हुई है। इन सभी पर दर्ज किए गए अपराधों के तहत दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। फिलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई तक आरोपियों की स्थिति पर फैसला सुरक्षित रखा है।
