कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ याचिका खारिज

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा चुनाव से जुड़ी कानूनी लड़ाई में बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामांकन पत्र को खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की पुनर्विचार याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की पुनर्विचार याचिका खारिज की

Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव की रेस से बाहर हुईं कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से एक बहुत बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र (उम्मीदवारी) को निर्वाचन अधिकारी द्वारा खारिज किए जाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद हम इस चरण में दखल नहीं दे सकते हैं। इस मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने की।

अदालत में सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कई महत्वपूर्ण और तीखी दलीलें पेश कीं। उन्होंने निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो कुछ भी हुआ है वह बेहद हैरान करने वाला है। सिंघवी ने दलील दी कि एक बेहद साधारण निजी शिकायत पर जारी हुए नोटिस को आधार बनाकर इतना बड़ा फैसला ले लिया गया, जबकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) साफ तौर पर कहता है कि उम्मीदवारी प्रभावित होने के लिए कम से कम कोर्ट द्वारा आरोप तय होने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला साल 2022 का है, जब मीनाक्षी नटराजन तेलंगाना की पार्टी इंचार्ज भी नहीं थीं और न ही इस मामले में अदालत द्वारा कोई वास्तविक संज्ञान लिया गया था। यह केवल तेलंगाना की एक स्थानीय अदालत में 2022 के पार्टी के अंदरूनी मसले से जुड़ी एक निजी शिकायत थी, जिसमें कोर्ट ने किसी भी अपराध का वास्तविक संज्ञान लेने से पहले नटराजन को केवल एक प्रारंभिक सिविल ‘कारण बताओ नोटिस’ यानी समन जारी किया था।

सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह तर्क भी रखा कि यदि कोई रिटर्निंग ऑफिसर (निर्वाचन अधिकारी) मनमाने ढंग से काम करता है, जिससे किसी विशेष राजनीतिक दल को सीधा फायदा पहुंचता हो, तो ऐसी असाधारण परिस्थितियों में अदालत को हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने इस बात पर भी गंभीर सवाल उठाए कि आखिर नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन ही नतीजों की घोषणा क्यों कर दी गई? सिंघवी ने जोर देकर कहा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन पत्र केवल एक ऐसी शिकायत का खुलासा न करने के आरोप में गलत तरीके से खारिज किया गया है, जो कि अनिवार्य श्रेणी में नहीं आती। उनके अनुसार, उम्मीदवार को केवल वही आपराधिक मामला घोषित करना होता है जिसमें न्यूनतम दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का कानूनी प्रावधान हो, जबकि इस मामले में केवल समन जारी हुए थे।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की इन तमाम दलीलों से बिल्कुल भी सहमत नहीं हुई और उसने याचिका को खारिज कर दिया। याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की और कहा कि एक बार जब किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त कर दिया जाता है, तो उसके पास तत्काल राहत पाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने या बाद में चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) के जरिए हाईकोर्ट जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है। अदालत ने सिंघवी से पलटकर यह सवाल भी पूछा कि क्या वे देश की न्यायपालिका का ऐसा कोई भी पिछला फैसला दिखा सकते हैं, जिसमें अदालत ने चुनाव के इस विशेष चरण में जाकर सीधे हस्तक्षेप किया हो?

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने आगे कहा कि निर्वाचन अधिकारी का निर्णय कितना भी त्रुटिपूर्ण या गलत क्यों न हो, एक बार प्रक्रिया के तहत नामांकन खारिज हो जाने के बाद कानूनन इसका उपाय कहीं और यानी केवल चुनाव याचिका के माध्यम से ही उपलब्ध होता है। अदालत ने कांग्रेस नेता को कानूनी राहत के लिए चुनाव याचिका के जरिए संबंधित हाईकोर्ट जाने का सुझाव दिया है।

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, प्रदेश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी से एक लिखित शिकायत की थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी शपथपत्र में तेलंगाना में दर्ज एक मामले की जानकारी छिपाई है। इसी शिकायत को आधार बनाते हुए राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों की गहन जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म-26 में एक कोर्ट में लंबित शिकायत का उल्लेख नहीं किया और इस प्रकार एक अधूरा शपथपत्र प्रस्तुत किया। इसी आधार पर चुनाव अधिकारी ने अंततः मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को रद्द घोषित कर दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बहाल करने से मना कर दिया है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale