अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत पर भारत सख्त, एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने दर्ज कराया कड़ा विरोध

खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल जहाज पर हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने अमेरिका के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बात की, जबकि IMO ने भी समुद्री सुरक्षा पर चिंता जताई। जानें पूरा मामला और इसका वैश्विक असर।

ओमान के तट पर अमेरिकी नौसेना द्वारा भारतीय क्रू मेंबर्स वाले कमर्शियल (व्यापारिक) जहाज पर किए गए हमले और उसमें तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत के मामले में भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर सीधी बातचीत की और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की इस कार्रवाई के खिलाफ भारत का तीव्र और कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्री ने इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण कूटनीतिक बातचीत की विस्तृत जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर साझा की है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि शुक्रवार की शाम उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बात की। उन्होंने बातचीत के दौरान खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत पर भारत का कड़ा विरोध पूरी स्पष्टता के साथ दोहराया। जयशंकर ने अमेरिका को दोटूक शब्दों में कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में व्यापारिक और कमर्शियल जहाजों के खिलाफ इस तरह की कोई भी घातक तथा जानलेवा सैन्य कार्रवाई किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराई जा सकती है।

इस हाई-प्रोफाइल घटना के बाद कूटनीतिक मोर्चे पर भी बड़ी हलचल देखी गई। ओमान के तट पर कमर्शियल जहाजों पर हुए इन सिलसिलेवार हमलों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को अमेरिकी राजनयिक को एक बार फिर तलब किया। यह दूसरी बार है जब भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी मिशन के कार्यवाहक (चार्ज डी-एफेयर्स) जेसन मीक्स को तलब कर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने व्यापारिक जहाजों पर हुए इन हमलों को बेहद चिंताजनक और संवेदनशील करार देते हुए इस पूरे मामले को अमेरिकी प्रशासन के सामने बेहद सख्ती और गंभीरता के साथ उठाया है।

इस बीच, अमेरिकी नौसेना की इस हिंसक कार्रवाई में तीन बेकसूर भारतीय नाविकों की मौत पर संयुक्त राष्ट्र (UN) समेत दुनिया के दूसरे प्रमुख संगठनों और देशों ने भी अमेरिकी सेना की तीखी आलोचना की है और इस सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है। वैश्विक मंच पर अमेरिकी दादागीरी के सामने तनकर खड़े होते हुए ‘अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन’ (IMO) ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापारिक मार्गों पर असर डालने वाली सभी सैन्य या कूटनीतिक गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय कानूनों तथा समुद्र में इंसानी जीवन व व्यक्ति की सुरक्षा का पूरा और अनिवार्य सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं, संयुक्त राष्ट्र ने भी आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वह आईएमओ के इस सख्त रुख से पूरी तरह इत्तेफाक और सहमति रखता है।

दुनिया भर में जहाजों की सुरक्षा, समुद्री अनुशासन और व्यापारिक नियमों की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र की इस विशेष और सर्वोच्च एजेंसी ‘अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन’ (IMO) ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर अमेरिका की कड़ी भर्त्सना की है। आईएमओ ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि होर्मुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) के पास हुई इस दुखद घटना में भारतीय क्रू वाले जहाज पर एक प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या गोला) से हमला किया गया था, जिसके कारण जहाज में भीषण आग लग गई और तीन बेकसूर नाविकों की जान चली गई। आईएमओ के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने इस पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह किसी भी देश या पक्ष की ओर से की गई ऐसी किसी भी खतरनाक हरकत की कड़ी निंदा करते हैं, जिससे निर्दोष नाविकों की जान और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा को कोई भी खतरा पैदा होता हो। उन्होंने इसे पूरी तरह से अस्वीकार्य बताते हुए उन तीनों मृत भारतीय नाविकों के शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ओमान तट के पास पलाऊ के झंडे वाले ऑयल टैंकर ‘एमटी सेटेबेलो’ पर अमेरिकी सेना की ओर से यह हमला किया गया था। इस विशाल जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे, जिनमें से 21 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि शुरुआत में लापता चल रहे तीन भारतीय नाविकों की अब मौत हो चुकी है। हादसे में जान गंवाने वाले इन भारतीय नाविकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश के रूप में की गई है।

इस दुखद घटना के बाद भारत ने वाशिंगटन स्थित अमेरिकी सरकार के साथ कड़ा विरोध दर्ज कराने के साथ ही नई दिल्ली में अमेरिकी राजनयिक को भी सख्त चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना पर भारत का आधिकारिक और सख्त रुख दोहराते हुए पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि भारतीय चालक दल के सदस्यों को ले जाने वाले मर्चेंट और व्यापारिक जहाजों पर ऐसे जानलेवा हमले तुरंत प्रभाव से बंद होने चाहिए। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता की जल्द वापसी सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों से हथियारों के बजाय बातचीत और कूटनीति का सहारा लेने का पुरजोर आह्वान किया है।

दूसरी तरफ, घिरी हुई अमेरिकी सेना ने इस हमले पर अपनी सफाई पेश करते हुए अजीब दावा किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि ‘एमटी सेटेबेलो’ को तब निशाना बनाया गया जब वह ईरान से जुड़े जहाजों पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और ब्लॉकेड को लागू करने के दौरान अमेरिकी नौसैनिक बलों द्वारा जारी किए गए सैन्य निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था। हालांकि, भारत सरकार ने अमेरिका के इस दावे के बीच अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए संबंधित सभी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही भारतीय नौसेना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री अधिकारियों को आपस में मजबूत समन्वय बनाकर समुद्र में चल रहे हर घटनाक्रम पर बारीक नजर रखने को कहा गया है ताकि भविष्य में किसी अन्य भारतीय नागरिक को कोई नुकसान न पहुंचे।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale