भारत-चीन रिश्तों में ऐतिहासिक मोड़: सितंबर में भारत आ सकते हैं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, 7 साल बाद होगी पहली यात्रा

भारत और चीन के कूटनीतिक संबंधों में बहुत जल्द एक ऐतिहासिक और बड़ा मोड़ देखने को मिल सकता है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच जमी बर्फ लगातार पिघल रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कूटनीतिक प्रयास रंग लाते दिख रहे हैं।

7 साल बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग
7 साल बाद भारत आ सकते हैं शी जिनपिंग

Xi Jinping India Visit: भारत और चीन के कूटनीतिक संबंधों में बहुत जल्द एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिल सकता है। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच जमी कड़वाहट धीरे-धीरे कम होती नजर आ रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लगातार कूटनीतिक प्रयास अब असर दिखाने लगे हैं। इसी बीच ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इसी साल सितंबर में भारत का दौरा कर सकते हैं। यदि यह यात्रा तय कार्यक्रम के अनुसार होती है, तो यह पिछले सात वर्षों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी, जिसे दोनों देशों के संबंधों में सुधार की दिशा में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि चीनी अधिकारियों ने भारत को इस बात के संकेत दे दिए हैं कि राष्ट्रपति शी के सम्मेलन में शामिल होने की संभावना काफी मजबूत है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन सिर्फ ब्रिक्स देशों की बैठक भर नहीं रहेगा, बल्कि एशिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों के बीच रिश्तों को नई दिशा देने वाला मंच भी बन सकता है।

इस कूटनीतिक घटनाक्रम को इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत यात्रा की पुष्टि कर दी है। रूसी समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद सीधे भारत पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी एससीओ सम्मेलन में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में सितंबर का महीना भारत के लिए बड़े वैश्विक कूटनीतिक आयोजनों का केंद्र बन सकता है।

शी जिनपिंग की संभावित यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि वह आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। उस दौरान तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच दूसरा अनौपचारिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था। उस मुलाकात में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और सीमा प्रबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे और रिश्तों में स्थिरता लाने की बात कही गई थी।

हालांकि, इसके कुछ ही महीनों बाद अप्रैल और मई 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प ने दोनों देशों के संबंधों को गहरे संकट में डाल दिया। इस घटना के बाद भारत और चीन के रिश्ते दशकों के सबसे खराब दौर में पहुंच गए थे। भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए चीन के कई मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था और सीमा पर सैन्य तैनाती को भी अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया गया था। इसके चलते कई वर्षों तक दोनों देशों के बीच गंभीर तनाव और गतिरोध बना रहा।

दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की ठोस शुरुआत अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान शहर में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई थी। कज़ान में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई अहम द्विपक्षीय बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को लागू करने पर सहमति बनी थी। इसे भारत-चीन संबंधों में जमी बर्फ पिघलने की शुरुआत माना गया।

कज़ान समझौते के बाद से सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर बातचीत तेज हुई है। सीमा पर तनाव कम करने, संवाद बहाल करने और आर्थिक रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने, व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और एशियाई भू-राजनीति में नए समीकरण बनाने की दिशा में एक निर्णायक मंच साबित हो सकता है।

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