अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहाँ से वापसी की गुंजाइश खत्म होती नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जो 10 दिनों की मोहलत दी थी, उसके खत्म होने से पहले ही मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बमवर्षकों और युद्धपोतों की गूंज सुनाई देने लगी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने हजारों नागरिकों के लिए ‘इमरजेंसी एडवाइजरी’ जारी कर उन्हें तुरंत देश छोड़ने को कहा है।
ईरान में दहशत: ‘Wait and See’ मैसेज और खामेनेई का बंकर
ईरान के भीतर इस समय मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) छिड़ा हुआ है। हजारों ईरानियों के फोन पर फारसी भाषा में एक अज्ञात संदेश आ रहा है— “इंतजार करो और देखो”। इसी बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की लोकेशन को लेकर रहस्य गहरा गया है। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खामेनेई के सीक्रेट बंकर को ट्रेस कर लिया है, जिसके बाद खामेनेई ने आनन-फानन में अपना उत्तराधिकारी चुन लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम इस बात का संकेत है कि खामेनेई को अपने ऊपर होने वाले सीधे हमले का अंदेशा हो चुका है।
तख्तापलट की मांग और अमेरिकी सैन्य घेराबंदी
ईरान के पांच प्रमुख विश्वविद्यालयों में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और खामेनेई सरकार के तख्तापलट की मांग कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप इसी मौके की तलाश में थे। आंतरिक विद्रोह के बीच, अमेरिकी वायुसेना ने ब्रिटेन और मिडिल ईस्ट में अपने सबसे घातक लड़ाकू विमानों की तैनाती कर दी है। ब्रिटेन के RAF लैकेनहीथ पर F-22 रैप्टर और F-15E स्ट्राइक ईगल्स मुस्तैद हैं। वहीं, ‘ई-3 सेंट्री’ जैसा हाईटेक एयररडार सिस्टम और ‘RC-135 रिवेट जॉइंट’ इंटेलिजेंस प्लेन आसमान से ईरान की हर हरकत पर नजर रख रहे हैं।
समुद्र के रास्ते भी घेराबंदी पूरी हो चुकी है। USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड आर फोर्ड जैसे विशालकाय विमानवाहक पोत अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ ईरान के दरवाजे यानी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की ओर बढ़ रहे हैं। पूर्व सीआईए अफसर जॉन किरियाकू की भविष्यवाणी के मुताबिक, ट्रंप अपनी डेडलाइन पूरी होने का इंतजार नहीं करेंगे और अगले कुछ घंटों में ही हमला शुरू हो सकता है।
ट्रंप के पास दो विकल्प: ‘ऑपरेशन वेनेजुएला’ या एटमी केंद्रों पर हमला
डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला विकल्प है ‘ऑपरेशन वेनेजुएला’ की तर्ज पर एक सर्जिकल स्ट्राइक, जिसमें खामेनेई के बंकर पर रेड मारकर उन्हें गिरफ्तार या खत्म किया जा सके। दूसरा विकल्प है— ईरान के परमाणु केंद्रों, बैलिस्टिक मिसाइल डिपो और सैन्य ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले (Limited Strike) करना।
दूसरी ओर, ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। खामेनेई की सेना ओमान की खाड़ी में युद्ध का अभ्यास कर रही है और अमेरिका को चेतावनी दी है कि हमला होने पर वे इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाएंगे। पूरी दुनिया की नजरें अब अगले कुछ घंटों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि क्या मिडिल ईस्ट एक भीषण युद्ध की आग में झुलसने वाला है।
