US Iran War: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे संयुक्त सैन्य हमले के बीच तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है, वहीं अमेरिका ने अपनी सैन्य रणनीति को और तेज करने के संकेत दिए हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जा सकता है। उन्होंने Kudlow शो पर बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के मिसाइल लॉन्चरों और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को निशाना बनाने की तैयारी कर रही है। उनके मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से कमजोर करना है।
बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं, ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में ईरान पर बमबारी अभियान और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि अमेरिकी सेना की कार्रवाई काफी प्रभावी रही है और इससे ईरान की सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस समय दो मोर्चों पर दबाव में है और अमेरिकी सैन्य अभियान उसे लगातार कमजोर कर रहा है।
इस बीच वैश्विक तेल बाजार को संतुलित रखने के लिए अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वॉशिंगटन ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी है। माना जा रहा है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
बेसेंट ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में रूस के कुछ कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। उनके अनुसार फिलहाल प्रतिबंधों के कारण करोड़ों बैरल कच्चा तेल समुद्र में पड़ा हुआ है और यदि इन प्रतिबंधों में राहत दी जाती है तो इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तेल आपूर्ति से जुड़े फैसलों का असर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है।
