US Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला प्रशासन ईरान पर संभावित नए सैन्य हमलों की तैयारी में जुटा हुआ है। हालांकि कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन व्हाइट हाउस और पेंटागन में हुई तेज गतिविधियों ने बड़े सैन्य कदम की आशंका को बढ़ा दिया है।
CBS और Axios की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ और चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना के कुछ जवानों की मेमोरियल डे छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और विदेशों में तैनात सैन्य ठिकानों के लिए “रिकॉल रोस्टर” को अपडेट किया जा रहा है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने कई निर्धारित कार्यक्रम भी रद्द कर दिए हैं। वे न्यू जर्सी के बेडमिंस्टर गोल्फ क्लब जाने वाले थे, लेकिन अचानक योजना बदलकर वाशिंगटन लौट आए। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की शादी में शामिल होने का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मौजूदा सरकारी परिस्थितियों और देशहित को देखते हुए उन्हें व्हाइट हाउस में रहना जरूरी लग रहा है। वहीं उनके करीबी सलाहकार डैन स्केविनो द्वारा B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स का एक वीडियो साझा किए जाने के बाद अटकलें और तेज हो गई हैं, क्योंकि पिछले ऐसे पोस्ट के बाद सैन्य कार्रवाई की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि कुछ दिन पहले तक ट्रंप ने कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही थी, लेकिन हाल के दिनों में उनका रुख अधिक आक्रामक होता दिख रहा है।
ट्रंप ने हालिया बयान में कहा कि ईरान बातचीत के लिए “बेहद उत्सुक” है, लेकिन अमेरिका किसी भी स्थिति में उसे परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा।
इस बीच क्षेत्रीय स्तर पर भी कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पाकिस्तान और कतर बैकचैनल डिप्लोमेसी के जरिए तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के तेहरान दौरे को भी इसी प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है।
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समय भारत के दौरे पर हैं, जिससे यह पूरा घटनाक्रम वैश्विक कूटनीति के लिहाज से और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
