Hormuz Crisis: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित ‘होर्मुज नाकेबंदी’ की मजबूती पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मंगलवार को शिपिंग डेटा से पता चला है कि अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित एक चीनी टैंकर न केवल स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से गुजरा, बल्कि उसने अमेरिकी घेराबंदी को सफलतापूर्वक पार भी कर लिया। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका ने दावा किया था कि वह ईरानी बंदरगाहों और प्रतिबंधित जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह नकेल कस चुका है।
चीनी टैंकर ‘रिच स्टारी’ ने पार की घेराबंदी
मरीनट्रैफिक और केप्लर के ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, चीनी स्वामित्व वाला टैंकर ‘रिच स्टारी’ (Rich Starry) नाकाबंदी शुरू होने के बाद होर्मुज को पार करने वाला पहला प्रतिबंधित जहाज बन गया है। यह टैंकर और इसकी मालिक कंपनी ‘शंघाई ज़ुआनरुं शिपिंग’ पर ईरान के साथ व्यापार करने के कारण अमेरिका ने पहले ही प्रतिबंध लगा रखे थे। लगभग 250,000 बैरल मेथनॉल ले जा रहा यह मध्यम आकार का टैंकर संयुक्त अरब अमीरात के हमरियाह बंदरगाह से माल लोड करके निकला था।
इतना ही नहीं, डेटा से यह भी पता चला है कि अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित एक अन्य टैंकर ‘मुरलीकिशन’ भी मंगलवार को होर्मुज में दाखिल हुआ। यह पोत, जिसे पहले एमकेए के नाम से जाना जाता था, रूसी और ईरानी तेल की ढुलाई के लिए चर्चित रहा है।
तेल की कीमतों में उबाल और कूटनीतिक हलचल
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अनिश्चितता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। हालांकि अमेरिका ने नाकेबंदी शुरू कर दी है, लेकिन तेल की आपूर्ति में बाधा आने की आशंका ने बाजार को तनाव में रखा है। इस बीच, कूटनीतिक स्तर पर भी प्रयास थमे नहीं हैं। इस्लामाबाद में पिछली वार्ता विफल होने के बावजूद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संकेत दिए हैं कि संघर्ष को सुलझाने की कोशिशें जारी हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, बातचीत का दूसरा दौर इसी गुरुवार (16 अप्रैल) को आयोजित किया जा सकता है।
ट्रंप का नया दावा: “ईरान समझौता चाहता है, पर परमाणु नहीं”
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक नया दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने उनसे संपर्क किया है और वे एक समझौता करने के इच्छुक हैं। हालांकि, ट्रंप ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि वह तेहरान के साथ ऐसा कोई भी समझौता नहीं करेंगे जो उसे परमाणु हथियार रखने की अनुमति देता हो।
कुल मिलाकर, चीनी टैंकरों की यह बेखौफ आवाजाही यह दर्शाती है कि अमेरिका के लिए इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण पाना इतना आसान नहीं होगा। अब पूरी दुनिया की नजरें गुरुवार को होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं कि क्या बातचीत के जरिए इस सैन्य और आर्थिक नाकेबंदी का कोई समाधान निकल पाएगा।
