मिडिल ईस्ट में महाजंग की आहट: ईरान पर अमेरिकी हमले की तैयारी, 24 घंटे में भेजे 50 फाइटर जेट

दूसरे दौर की परमाणु वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei ने भी अमेरिका को करारा जवाब देने की बात कही।

Tensions Escalate in Middle East as US Deploys 50 Fighter Jets Amid Iran Strike Speculation
Tensions Escalate in Middle East as US Deploys 50 Fighter Jets Amid Iran Strike Speculation

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं और ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमले की प्रबल संभावनाओं ने पूरे क्षेत्र में भारी तनाव पैदा कर दिया है। मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को एक तरफ जिनेवा में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच परमाणु वार्ता को लेकर मेज पर चर्चा हुई, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने युद्ध के मैदान में अपनी घेराबंदी तेज कर दी है। बीते 24 घंटों के भीतर अमेरिका ने ईरान की सीमा के पास 50 से ज्यादा अत्याधुनिक फाइटर जेट तैनात कर दिए हैं, जिससे एक बड़े संघर्ष की आहट साफ सुनाई देने लगी है।

अमेरिकी न्यूज वेबसाइट ‘Axios’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन मिडिल ईस्ट में एक ऐसे सैन्य अभियान की तैयारी में है, जो इतना व्यापक होगा कि अधिकांश अमेरिकी इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। सूत्रों का दावा है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर इस बार ईरान की सरकार के लिए बेहद खतरनाक स्थिति पैदा करने वाले हैं। यह संभावित सैन्य अभियान कई हफ्तों तक चल सकता है। हालांकि पिछले साल अमेरिका ने ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधाओं पर हमला किया था, लेकिन इस बार की तैयारी पूरे क्षेत्र के समीकरण बदलने वाली बताई जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि इतनी बड़ी सैन्य हलचल के बावजूद अमेरिकी संसद और जनता के बीच इस पर कोई खास सार्वजनिक चर्चा नहीं हो रही है।

जमीन पर युद्ध की तैयारी की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 150 से अधिक अमेरिकी मिलिट्री कार्गो विमानों ने मध्य पूर्व में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद पहुँचाया है। इन विमानों के साथ F-35, F-22 और F-16 जैसे 50 घातक फाइटर जेट्स भी तैनात किए गए हैं। सीनेटर लिंडसे ग्राहम और ट्रंप के सलाहकारों का मानना है कि अगले कुछ हफ्तों में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई होने की 90 फीसदी संभावना है।

कूटनीतिक मोर्चे पर भी स्थिति बहुत स्पष्ट नहीं है। जिनेवा में ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से करीब तीन घंटे तक मुलाकात की। हालांकि इस वार्ता में प्रगति का दावा किया गया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मतभेद अब भी बहुत गहरे बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ‘फॉक्स न्यूज’ को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप समझौता तो चाहते हैं, लेकिन उन्होंने कुछ ऐसी सख्त सीमाएं तय की हैं जिन पर ईरान कभी तैयार नहीं होगा।

फिलहाल, परमाणु डील पर सहमति की उम्मीद कम नजर आ रही है और अमेरिका की बढ़ती सैन्य ताकत यह संकेत दे रही है कि अगर बातचीत विफल रही, तो मिडिल ईस्ट में एक बड़ा ऑपरेशन शुरू होना तय है। ट्रंप प्रशासन की ओर से दी गई ‘खामियाजा भुगतने’ की चेतावनी और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई द्वारा करारा जवाब देने की बात ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

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