ईरान में जारी जन-आंदोलन अब एक भयावह मोड़ ले चुका है, जहां सरकारी दमन और हिंसा की खबरें पूरी दुनिया को झकझोर रही हैं। तेहरान के एक डॉक्टर ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर ‘टाइम मैगजीन’ को दिए इंटरव्यू में जो दावे किए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। डॉक्टर के अनुसार, राजधानी तेहरान के केवल छह प्रमुख अस्पतालों में ही कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। इनमें से अधिकांश मौतें सुरक्षा बलों द्वारा सीधे तौर पर चलाई गई गोलियों के कारण हुई हैं। हालांकि, संचार ब्लैकआउट और मीडिया पर कड़े प्रतिबंधों के कारण इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद मुश्किल बना हुआ है।
यह विद्रोह, जिसकी शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को गिरते रियाल और बढ़ती महंगाई जैसे आर्थिक मुद्दों से हुई थी, अब ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है। अब प्रदर्शनकारियों की मांग केवल आर्थिक सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ‘आजादी’ और ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारों के साथ मौजूदा इस्लामी शासन को उखाड़ फेंकने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनों की उग्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तेहरान की अल-रसूल मस्जिद सहित कई सरकारी इमारतों में आग लगाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
जमीनी स्तर पर हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। डॉक्टर का दावा है कि उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षा बलों ने मशीनगन से अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कई युवा प्रदर्शनकारी मौके पर ही मारे गए। मानवाधिकार संगठन ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ (HRANA) ने फिलहाल मौतों का आंकड़ा कम बताया है, लेकिन उन्होंने भी स्वीकार किया है कि अब तक कम से कम 63 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 49 नागरिक और 14 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
इस बीच, ईरानी नेतृत्व ने झुकने के बजाय दमन का रास्ता चुना है। सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस्लामिक रिपब्लिक इन ‘उपद्रवियों’ के सामने कभी नहीं झुकेगा। तेहरान के सरकारी वकील ने प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा की चेतावनी दी है, जबकि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के अधिकारियों ने माता-पिता से अपने बच्चों को सड़कों से दूर रखने को कहा है। उन्होंने डरावने लहजे में आगाह किया है कि अगर किसी बच्चे को गोली लगती है, तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की नहीं होगी।
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने खामेनेई शासन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या जारी रही, तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे। फिलहाल पूरे ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप हैं, जिससे देश एक तरह से बाहरी दुनिया से कट गया है। पानी की कमी, बिजली कटौती और आर्थिक बदहाली ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है, जिससे यह आंदोलन 1979 की क्रांति के बाद का सबसे बड़ा संकट बनता जा रहा है।
