Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश की नई संसद के शपथ ग्रहण के साथ ही देश की राजनीति में नया टकराव सामने आ गया है। एक ओर Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने 12 फरवरी के चुनाव में 212 सीटें जीतकर सत्ता संभाल ली, वहीं दूसरी ओर चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी Bangladesh Jamaat-e-Islami पहले ही दिन आक्रामक रुख में दिखी। बीएनपी सांसदों ने संसद सदस्य के रूप में तो शपथ ले ली, लेकिन ‘जुलाई चार्टर’ से जुड़े संविधान सुधार परिषद के सदस्य के तौर पर शपथ लेने से इनकार कर दिया। इसी फैसले के विरोध में जमात-ए-इस्लामी और उसकी सहयोगी National Citizen Party (एनसीपी) ने बीएनपी कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार कर दिया।
जमात नेता शफीकुल इस्लाम मसूद ने संसदीय समिति की बैठक के बाद कहा कि बीएनपी द्वारा संविधान सुधार परिषद की शपथ से इनकार करना जनमत का अनादर है, इसलिए पार्टी ने समारोह में शामिल न होने का निर्णय लिया। 12 फरवरी को हुए चुनाव में बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला, जबकि जमात और एनसीपी समेत 11 सहयोगियों ने 77 सीटें जीतीं। इसी दिन जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह भी कराया गया, जिसमें 62 प्रतिशत मतदाताओं ने समर्थन दिया।
विवाद की जड़ दोहरी शपथ की प्रक्रिया है। जुलाई चार्टर का उद्देश्य नई संसद को 180 दिनों के लिए संविधान सभा में बदलना है, ताकि वह संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं में व्यापक संशोधन कर सके। बीएनपी ने अक्टूबर 2025 में इस चार्टर पर हस्ताक्षर तो किए थे, लेकिन अब उसका कहना है कि अंतिम दस्तावेज में कई नए प्रावधान जोड़ दिए गए हैं, जिन पर उससे पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया। पार्टी का तर्क है कि चुनाव पहले कराए जाने चाहिए थे, जबकि जमात और एनसीपी चुनाव से पहले सुधार लागू करने की मांग कर रहे थे। अंततः अंतरिम सरकार के प्रमुख Muhammad Yunus ने 12 फरवरी को ही चुनाव और जनमत-संग्रह दोनों आयोजित कराए।
मंगलवार को जब निर्वाचित सांसदों ने शपथ ली, तब बीएनपी सदस्यों ने संविधान सुधार परिषद के लिए दूसरी शपथ लेने से इनकार कर दिया। इसके विपरीत जमात और एनसीपी के सांसदों ने संसद सदस्य के साथ-साथ सुधार आयोग के सदस्य के रूप में भी शपथ ली। इससे सत्ता पक्ष और सहयोगी दलों के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई।
राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। बीएनपी प्रमुख Tarique Rahman ने शपथ ली तो उसी दिन जमात और एनसीपी ने बीएनपी को ‘फासीवादी’ ताकत बताते हुए सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी। जमात महासचिव मिया गोलाम परवार ने चुनाव में कथित हेरफेर और चुनाव बाद हिंसा के आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं लोगों को फिर से ‘फासीवाद’ की याद दिलाती हैं। यह शब्द पहले 2024 के आंदोलनों में Sheikh Hasina और उनकी पार्टी के खिलाफ इस्तेमाल हुआ था, लेकिन अब वही आरोप बीएनपी पर लगाए जा रहे हैं।
एनसीपी के मुख्य आयोजक नासिरुद्दीन पटवारी ने भी महिलाओं के खिलाफ कथित उत्पीड़न और चुनावी अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि जनता को निराश नहीं होना चाहिए और सत्ता में बैठे नेताओं को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
जुलाई चार्टर को लेकर शुरू हुआ यह टकराव साफ संकेत देता है कि नई सरकार के गठन के साथ ही बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता की आशंका बनी हुई है। सत्ता और सहयोगी दलों के बीच मतभेद यदि जल्द नहीं सुलझे, तो देश एक बार फिर व्यापक राजनीतिक आंदोलन की ओर बढ़ सकता है।
