ढाका से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है, जहां बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बुधवार रात राष्ट्र के नाम अपना पहला संबोधन दिया। प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद अपने पहले संदेश में उन्होंने देश के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने लोकतंत्र को मजबूत करने, कानून-व्यवस्था सुधारने और भ्रष्टाचार पर सख्ती से अंकुश लगाने का संकल्प दोहराया।
अपने संबोधन में तारिक रहमान ने सांप्रदायिक सौहार्द पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे कोई मुस्लिम हो, हिंदू, बौद्ध या ईसाई—धर्म के आधार पर किसी की नागरिकता या अधिकारों में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश सभी नागरिकों का समान रूप से देश है और इसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी सबकी साझा है। हाल के महीनों में देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाओं के बीच उनका यह संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि उनकी सरकार ऐसे समय में सत्ता में आई है जब देश आर्थिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और बिगड़ी कानून-व्यवस्था जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार शांति और सुरक्षा का माहौल बहाल करने के लिए प्रशासनिक सुधारों और पारदर्शिता पर जोर देगी। उन्होंने कहा कि जनता के अधिकारों की रक्षा उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और इसके लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम किया जाएगा।
“Be it a Muslim, Hindu, Buddhist, Christian this country belongs to all. This is our country,” Bangladesh PM @trahmanbnp said today in his first address to the nation since assuming charge. #Bangladesh pic.twitter.com/huvsk5HQJh
— Nayanima Basu (@NayanimaBasu) February 18, 2026
तारिक रहमान ने पवित्र रमजान के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और व्यापारियों से अपील की कि वे आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित रखें। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव समाप्त होने के साथ ही राजनीतिक मतभेदों का दौर खत्म हो जाना चाहिए। चाहे किसी ने बीएनपी को वोट दिया हो या नहीं, सरकार सभी नागरिकों की है और किसी के साथ राजनीतिक विचारधारा, धर्म या सोच के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा।
अपने संबोधन में उन्होंने संस्थागत सुधारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की सभी संवैधानिक, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं कानून और नियमों के तहत काम करेंगी। साथ ही उन्होंने देश की बड़ी आबादी को कौशलयुक्त कार्यबल में बदलने की योजना पर बल दिया। उनका कहना था कि यदि युवाओं को प्रशिक्षित और सक्षम बनाया जाए तो यही जनसंख्या देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है और बांग्लादेश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकती है।
प्रधानमंत्री के इस पहले संबोधन को नई सरकार की दिशा और प्राथमिकताओं का संकेत माना जा रहा है, जिसमें लोकतंत्र, समावेशिता और आर्थिक सुधार पर स्पष्ट फोकस दिखा।
