ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के चरमराने का खतरा पैदा हो गया है। इस युद्ध का केंद्र बना हुआ है ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz), जिसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे भयावह चेतावनी दी है। ट्रंप ने न केवल ईरान पर 20 गुना अधिक शक्ति से हमले की बात कही है, बल्कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते के बहाने चीन को भी इस संघर्ष में सक्रिय होने का खुला ऑफर दे दिया है।
ट्रंप की ‘मौत और कहर’ वाली चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा है कि यदि ईरान ने हॉर्मुज में तेल की आवाजाही रोकने की कोशिश की, तो अमेरिका उस पर ऐसा कहर बरपाएगा कि उसे एक देश के रूप में दोबारा खड़ा होना नामुमकिन हो जाएगा। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा, “उन पर मौत, आग और कहर बरसेगा।” जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान उनके उस कैलकुलेशन को दर्शाता है जिसमें युद्ध उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं चल रहा है। उन्होंने इसे चीन और उन देशों के लिए एक ‘उपहार’ बताया है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रास्ते पर निर्भर हैं, ताकि वे भी ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ दें।
.@POTUS on oil and the Strait of Hormuz: "In recent years, the regime and its terror proxies have launched attacks on hundreds of commercial vessels. We're putting an end to all of this threat once and for all—and the result will be lower oil prices for American families… In… pic.twitter.com/9KCEtY3baf
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) March 9, 2026
हॉर्मुज का रणनीतिक महत्व और फंसा हुआ भारत
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल लाइफलाइन’ है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा और भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती है। वर्तमान तनाव के कारण यह पूरा इलाका एक तरह से ‘जाम’ हो चुका है। कई देशों के व्यापारिक जहाज (Ships) वहां फंसे हुए हैं, जिनमें भारत के जहाज भी शामिल हैं। हालांकि भारत सहित कोई भी देश आधिकारिक तौर पर अभी कुछ भी कहने से बच रहा है, लेकिन स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। दूसरी ओर, ईरान का दावा है कि हॉर्मुज पूरी तरह उसके नियंत्रण में है और वह किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।
चीन को साधने की कोशिश: 40% तेल का गणित
ट्रंप की इस चेतावनी के पीछे एक गहरा कूटनीतिक दांव भी है। चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सबसे ज्यादा हॉर्मुज के रास्ते पर निर्भर है। इस रास्ते से गुजरने वाले कुल तेल प्रवाह का लगभग 37.7 प्रतिशत (करीब 5.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन) अकेले चीन को जाता है। एशियाई देशों में भारत, जापान और दक्षिण कोरिया भी इसी मार्ग पर निर्भर हैं, लेकिन चीन सबसे बड़ा हिस्सेदार है। अमेरिका का मानना है कि यदि चीन को अपनी तेल आपूर्ति रुकने का डर सताएगा, तो वह ईरान पर दबाव बनाने के लिए मजबूर होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हॉर्मुज में आवाजाही लंबे समय तक ठप रही, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ेगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चीन इस अमेरिकी ‘ऑफर’ को स्वीकार करता है या यह संघर्ष एक बड़े वैश्विक युद्ध की चिंगारी बनेगा।
