मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (UBT) के भीतर मची भारी उथल-पुथल और सांसदों की संभावित बगावत की खबरों के बीच बुधवार को एक बड़ा नया मोड़ सामने आया है। पार्टी में बड़ी टूट की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान संजय राउत ने बेहद कड़े और आक्रामक तेवर दिखाते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी के सभी सांसद पूरी तरह एकजुट हैं और बगावत की खबरें महज एक राजनीतिक अफवाह हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसदों को किया पेश, बोले- ‘यह ऑपरेशन टाइगर है’
मीडिया को संबोधित करते हुए संजय राउत ने कहा, “महाराष्ट्र में जिस ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा चल रही थी, उसकी असलियत आपके सामने है।” अपने दावों को मजबूती देने के लिए राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने साथ मौजूद सांसदों को मीडिया के सामने पेश किया। उन्होंने कहा कि हमारे साथ यहां मंच पर यूबीटी के लोकसभा नेता अरविंद सावंत, चीफ व्हिप अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे खुद मौजूद हैं।
उन्होंने सांसदों की अनुपस्थिति पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि हमारी पार्टी के कुछ सांसद इस वक्त मुंबई में हैं तो कुछ दिल्ली में अपनी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ‘धनुष-बाण’ का मूल निशान केवल और केवल शिवसेना और उद्धव ठाकरे का था, जिसके हक के लिए वे सुप्रीम कोर्ट तक गए थे।
कसम तोड़ने वाले बागी सांसदों को दी खुली चेतावनी
संजय राउत ने प्रेस वार्ता के दौरान संभावित बागियों को बेहद सख्त और खुली चेतावनी दी। उन्होंने भावुक और आक्रामक लहजे में कहा, “पार्टी के सांसदों ने पूरी निष्ठा के साथ कसमें खाई हैं। किसी ने शिरडी के साईं बाबा की शपथ ली है, किसी ने मां भवानी की शपथ ली है, किसी ने अपनी सगी मां की कसम खाई है, तो किसी और ने अपनी मां-बेटी की कसम खाई है। इन पवित्र कसमों को खाने के बाद भी अगर कोई शिवसेना (UBT) छोड़कर पीठ में छुरा घोंपने का प्रयास करेगा, तो हम उसे किसी भी कीमत पर छोड़ेंगे नहीं।”
राउत ने आगे कहा कि मौजूदा स्थिति में मैं यही मानता हूं कि हमारे सभी सांसद मजबूती से उद्धव जी के साथ खड़े हैं। हमने व्यक्तिगत रूप से सभी सांसदों से बात की है। इसके बाद भी अगर किसी के मन में खोट है और वह दगाबाजी करना चाहता है, तो उसे याद रखना चाहिए कि इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि जिन्हें जाना है, वे मर्यादा के साथ पहले अपने पद से इस्तीफा दें और फिर जाएं।
यूबीटी ने पलटा बागियों का गेम, अटकलें साबित हुईं गलत
पिछले कुछ दिनों से देश के राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि विपक्षी गठबंधन में आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बाद अब अगला नंबर उद्धव ठाकरे गुट का है, जिसमें एक बड़ी टूट होने जा रही है। मंगलवार देर रात दो सांसदों के चार्टर्ड प्लेन से दिल्ली पहुंचने की खबर ने इन अफवाहों को और हवा दे दी थी।
हालांकि, बुधवार को नई दिल्ली में समीकरण पूरी तरह बदलते दिखे। शिवसेना (UBT) के दो तथाकथित बागी सांसदों— राजाभाऊ वाजे और संजय दीना पाटील ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट (SHS) के साथ जाने की तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उनके इस आधिकारिक बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यूबीटी खेमे ने बागियों और विरोधियों के पूरे गेम को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। हालांकि, दोपहर तक सूत्रों के हवाले से यह दावा भी किया जा रहा था कि बागी सांसद कुछ ही देर में लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के आवास पर जाकर अलग गुट की मान्यता के लिए मुलाकात कर सकते हैं, लेकिन अंततः ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।
दलबदल कानून के तहत चाहिए था 7 सांसदों का समर्थन
राजनीतिक और कानूनी गणित के अनुसार, दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत बिना सदस्यता गंवाए लोकसभा में उद्धव गुट से अलग होने के लिए बागी सांसदों को कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी। चूंकि लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल सांसदों की संख्या 9 है, इसलिए किसी भी कानूनी दलबदल या अलग गुट के गठन के लिए कम से कम 7 सांसदों के सामूहिक समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता थी।
इससे पहले, मुंबई स्थित उद्धव ठाकरे के निवास ‘मातोश्री’ में बुलाई गई आपातकालीन बैठक में जब 9 में से केवल 4 सांसद ही व्यक्तिगत रूप से पहुंचे थे, तब राजनीतिक पंडितों ने इसे पार्टी की दूसरी सबसे बड़ी ऐतिहासिक टूट की आहट मान लिया था। लेकिन दिल्ली में संजय राउत की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस और सांसदों की एकजुटता के बाद फिलहाल उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी पर मंडरा रहे इस बड़े सियासी संकट को सफलतापूर्वक टाल दिया है।
