US Iran Peace Deal: पिछले करीब 4 महीनों से पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तबाही मचाने वाले भीषण युद्ध के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता महज कुछ ही पल दूर है। दोनों देश युद्धविराम की शर्तों पर सहमत हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कई गंभीर मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तनाव और विरोधाभासी दावे बरकरार हैं। फ्रांस के एवियान शहर में आयोजित हो रहे G7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ा और बड़ा बयान देकर स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका, ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में फिलहाल किसी तरह की कोई रियायत या राहत नहीं देने जा रहा है।
शिखर सम्मेलन से इतर मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दो टूक लहजे में कहा कि इस ऐतिहासिक डील के तहत ईरान को तुरंत कोई आर्थिक ढील नहीं मिलेगी। यह पूरी तरह से ईरान के आगामी ‘व्यवहार’ पर निर्भर करेगा कि वह शांति समझौते की शर्तों को जमीन पर कितना पूरा करता है।
“ओबामा की डील बेहद घटिया थी, मेरी डील बेहद शक्तिशाली”
जब पत्रकारों ने राष्ट्रपति ट्रंप से सीधे तौर पर पूछा कि क्या इस नए समझौते के लागू होने के बाद ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से मुक्ति मिलेगी? इस पर ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “बिल्कुल नहीं, इस समझौते में कोई भी प्रतिबंध राहत (Sanction Relief) शामिल नहीं है। यह पूरी तरह से उनके (ईरान के) आचरण और व्यवहार पर टिका है। अगर वे वह सब कुछ ईमानदारी से करते हैं जो उन्हें इस समझौते के तहत करना चाहिए, तभी भविष्य में प्रतिबंधों को हटाने पर विचार किया जा सकता है।”
इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने साल 2015 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते (JCPOA) पर भी जमकर तंज कसा। उन्होंने अपनी डील की तुलना करते हुए कहा, “मैं बहुत जल्द इस समझौते के सभी कानूनी दस्तावेजों को पूरी दुनिया के सामने सार्वजनिक करना चाहता हूं, क्योंकि यह एक बेहद शक्तिशाली दस्तावेज है। यह ओबामा के उस दस्तावेज जैसा बिल्कुल नहीं है, जो बेहद कमजोर और घटिया था।” ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में होने वाले अंतिम हस्ताक्षर समारोह में अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) मौजूद रहेंगे और समझौते पर दस्तखत करेंगे।
शांति समझौते के सहमति पत्र (MoU) पर हुए डिजिटल दस्तखत
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ‘रॉयटर्स’ ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बेहद अहम जानकारी साझा करते हुए बताया है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के इस समझौते पर ‘इलेक्ट्रॉनिक रूप से’ (Digitally) हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आधिकारिक सहमति पत्र (MoU) पर खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की तरफ से वहां की संसद के अध्यक्ष व मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघर गालिबफ ने डिजिटल माध्यम से अपनी अंतिम स्वीकृति दे दी है। हालांकि, ईरान सरकार या उनकी आधिकारिक मीडिया की तरफ से इस डिजिटल सिग्नेचर को लेकर अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
शुक्रवार से खुलेगा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’, ग्लोबल मार्केट में बंपर तेजी
भले ही प्रतिबंधों को लेकर कूटनीतिक खींचतान जारी हो, लेकिन युद्धविराम और शांति समझौते की आधिकारिक घोषणा होते ही पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है। इस ऐतिहासिक कदम की वजह से वैश्विक आर्थिक मंच पर बेहद सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है:
- कच्चा तेल हुआ धड़ाम: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें तेजी से नीचे गिरी हैं, जिससे दुनिया भर के विकासशील देशों को बड़ी राहत मिलेगी। कच्चे तेल के दामों में आई इस बड़ी गिरावट पर राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपनी खुशी जाहिर की है।
- शेयर बाजारों में रिकॉर्ड उछाल: युद्ध खत्म होने की खबर से दुनिया भर के प्रमुख शेयर बाजारों (Stock Markets) में बंपर तेजी का रुख देखा जा रहा है और निवेशकों का भरोसा फिर से लौट आया है।
- लाइफलाइन मार्ग की बहाली: वैश्विक व्यापार और विशेषकर तेल परिवहन की रीढ़ माने जाने वाले ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को आगामी शुक्रवार से पूरी तरह से जहाजों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुए इस पूरे शांति समझौते का विस्तृत मसौदा और इसकी सभी शर्तें अगले 24 से 48 घंटों के भीतर आधिकारिक तौर पर दुनिया के सामने रख दी जाएंगी।
