पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नेतृत्व में अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के अनुसार, इन देशों का मानना है कि एक महीने तक चले हवाई हमलों के बावजूद तेहरान का धार्मिक शासन अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।
जंग की शुरुआत में सूचना साझा न किए जाने से नाराज रहे ये देश अब इस स्थिति को एक ‘ऐतिहासिक अवसर’ के रूप में देख रहे हैं। सऊदी अरब, UAE, कुवैत और बहरीन ने निजी तौर पर स्पष्ट किया है कि वे तब तक सैन्य ऑपरेशन रोकने के पक्ष में नहीं हैं, जब तक कि ईरानी नेतृत्व में कोई बड़ा और बुनियादी बदलाव न हो जाए। यह मांग ऐसे समय में आई है जब इस भीषण युद्ध में अब तक 3,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध विस्तार या समझौते के बीच दुविधा में हैं।
खाड़ी देशों के बदले सुर और ट्रंप की प्रतिक्रिया
रविवार शाम को एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने खाड़ी देशों के कड़े रुख की पुष्टि की। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब, कतर, UAE, कुवैत और बहरीन अब जोरदार पलटवार की मुद्रा में हैं।” हालांकि इन देशों की जमीन पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं जहाँ से हमले किए जा रहे हैं, लेकिन इन देशों ने स्वयं सीधे तौर पर युद्ध में हिस्सा नहीं लिया है। इसके बावजूद, अब क्षेत्रीय नेता मोटे तौर पर अमेरिकी सैन्य कोशिशों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।
UAE का सख्त रवैया और जमीनी हमले की मांग
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, खाड़ी देशों में UAE सबसे सख्त रुख अपनाए हुए है। वह राष्ट्रपति ट्रंप पर ईरान के खिलाफ ‘जमीनी हमले’ (Ground Invasion) का आदेश देने के लिए लगातार जोर डाल रहा है। कुवैत और बहरीन भी इस विकल्प का समर्थन कर रहे हैं। दरअसल, युद्ध लंबा खिंचने से UAE की चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान की ओर से हुए 2,300 से अधिक मिसाइल और ड्रोन हमलों ने मिडिल-ईस्ट के व्यापार और पर्यटन केंद्र के रूप में UAE की सुरक्षित छवि को नुकसान पहुँचाया है, जिससे वहां का नेतृत्व काफी आक्रोश में है।
शांति बनाम ‘मुकम्मल समाधान’
जहाँ एक ओर ओमान और कतर अभी भी कूटनीतिक समाधान की वकालत कर रहे हैं, वहीं सऊदी अरब ने अमेरिका को दो टूक तर्क दिया है कि इस समय युद्ध रोकना किसी भी ‘अच्छे समझौते’ की संभावना को खत्म कर देगा। सऊदी अरब का मानना है कि इस युद्ध का अंतिम समाधान तभी संभव है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया जाए, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट किया जाए और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिज्बुल्लाह और हूती) के लिए तेहरान का समर्थन हमेशा के लिए खत्म हो।
फिलहाल, खाड़ी देशों का यह साझा दबाव राष्ट्रपति ट्रंप की भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकता है, जिससे आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज होने की आशंका बढ़ गई है।
