PoK Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भारी बवाल, पुलिस और JAAC के बीच हिंसक झड़प में 7 की मौत; इंटरनेट सेवा ठप

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सोमवार को पुलिस और एक प्रतिबंधित प्रदर्शनकारी समूह के सदस्यों के बीच भीषण हिंसक झड़पें हुईं। इस हिंसा में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सोमवार को पुलिस और प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के समर्थकों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा हिंसा रावलकोट शहर में देखने को मिली। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

रावलकोट के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कमिश्नर सरदार वहीद ने बताया कि झड़पों के दौरान तीन नागरिकों की मौत हुई और करीब 40 लोग घायल हुए हैं। वहीं पुलिस विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों के दौरान चार पुलिसकर्मियों की भी जान चली गई, जबकि 23 अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

यह हिंसा JAAC द्वारा घोषित विरोध प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले हुई। प्रशासन ने हाल ही में सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था। अधिकारियों का कहना है कि संगठन पिछले कुछ वर्षों में कई उग्र प्रदर्शनों और आंदोलन में शामिल रहा है। इसके बावजूद JAAC ने संकेत दिया है कि वह अपनी मांगों को लेकर आगामी दिनों में भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन जारी रखेगा।

मंगलवार को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन हाल की घटनाओं के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने JAAC के एक प्रमुख नेता की हत्या की है। इसके अलावा इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर भी लोगों में नाराजगी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से बिजली संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के कथित दोहन जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इन मुद्दों पर सरकार पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। साथ ही क्षेत्र को राजनीतिक रूप से नजरअंदाज किए जाने को लेकर भी लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

राजनीतिक मुद्दों को लेकर आलोचकों ने विधानसभा में मौजूद 12 शरणार्थी सीटों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इन सीटों का इस्तेमाल पाकिस्तान सरकार क्षेत्र में अपना राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के लिए करती है। हालांकि सरकार ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बढ़ते तनाव और संभावित अशांति को देखते हुए प्रशासन ने पूरे पीओके में टेलीकॉम और इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों ने मुजफ्फराबाद सहित कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और पाकिस्तान रेंजर्स की तैनाती की है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

इस बीच, इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें सतर्क रहने और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। दूतावास ने कहा है कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए।

वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी पर्यटकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए लोगों को 5 जून से 20 जून के बीच पीओके की यात्रा नहीं करने की सलाह दी है। प्रशासन का कहना है कि हालात सामान्य होने तक एहतियात बरतना जरूरी है।

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