नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा सुधारों को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान दर्ज एफआईआर और गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पक्ष रखते हुए बताया कि जिन लोगों के खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज नहीं हैं, उन्हें रिहा किया जा चुका है। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार इस पूरे मामले पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है और एक उचित समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है। एफआईआर को रद्द करने या वापस लेने के सवाल पर सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि सरकार अपने वादे पर पूरी तरह कायम है और इस संबंध में जो भी कानूनी रूप से सही प्रक्रिया होगी, उसे ही अपनाया जाएगा।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के आचरण पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि कई ऐसे वीडियो उपलब्ध हैं जिनमें पुलिस का बर्ताव स्पष्ट दिखाई दे रहा है और संबंधित पुलिसकर्मियों की पहचान भी हो चुकी है। याचिकाकर्ता पक्ष ने मांग की कि पुलिस के आईजी (IG) और आरएएफ (RAF) डायरेक्टर को यह बताने के निर्देश दिए जाएं कि प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किस आधार पर दी गई थी। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने पुलिस द्वारा इस मामले में जल्द से जल्द क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की भी मांग की।
