Republic of Balochistan: PoK में तनाव के बीच बलूचिस्तान से बड़ी खबर, 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का ऐलान

Republic of Balochistan Independence Day: बलूच नेताओं ने 11 अगस्त 1947 के इतिहास का हवाला देते हुए इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की मांग की है।

बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को घोषित किया 'स्वतंत्रता दिवस'
बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को घोषित किया 'स्वतंत्रता दिवस'

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान के सबसे बड़े और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रांत बलूचिस्तान से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस घोषित करते हुए दुनिया भर में फैले बलूच समुदाय से इसे बड़े पैमाने पर मनाने की अपील की है। इसके साथ ही संगठन ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में औपचारिक मान्यता देने की मांग की है।

11 अगस्त को ही क्यों चुना गया?

बलूच आंदोलन से जुड़े नेता मीर यार बलोच और संगठन के अनुसार, 11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन समाप्त होने से ठीक पहले कलात (बलूचिस्तान) ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। संगठन का दावा है कि उस समय पाकिस्तान ने भी इसकी स्वतंत्रता को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में कूटनीतिक दबाव और सैन्य बल के प्रयोग से इसे पाकिस्तान में शामिल होने पर मजबूर कर दिया गया। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आधार पर बलूच नेता 11 अगस्त को हर साल स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने की बात कह रहे हैं।

धर्मनिरपेक्ष संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकार का वादा

हाल ही में बलूचिस्तान आंदोलन के नेताओं ने अपने ‘अंतरिम संविधान’ का खाका भी पेश किया है, जिसे 11 प्रमुख भाषाओं (जिनमें हिंदी, मराठी, गुजराती और पंजाबी शामिल हैं) में अनुवादित किया गया है।

  • धर्म निरपेक्षता: संविधान की पहली पंक्ति में ही धर्म और राजनीति को अलग रखने की बात कही गई है।
  • अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: पाकिस्तान के विपरीत, इस चार्टर में हिंदू, सिख और ईसाई समुदायों को पूर्ण सुरक्षा, समानता और सर्वधर्म समभाव की गारंटी दी गई है।

पाकिस्तान सरकार पर गंभीर आरोप

‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ ने आरोप लगाया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी वर्तमान स्थिति में रहेगा, तब तक दक्षिण एशिया में स्थायी शांति, विकास और समृद्धि संभव नहीं है। संगठन ने आरोप लगाया कि 1948 में बलूचिस्तान में हुई सैन्य कार्रवाई, 1971 का पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) संकट, आतंकवाद और चागई परमाणु परीक्षण जैसी घटनाओं ने इस पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और हिंसा को जन्म दिया है।

मौजूदा वैश्विक स्थिति

यद्यपि वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र (UN) या किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था ने बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं दी है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह आधिकारिक रूप से पाकिस्तान का ही हिस्सा माना जाता है, लेकिन 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस घोषित करने और व्यापक अपील जारी करने से यह मुद्दा एक बार फिर वैश्विक मंच पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

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