145 साल पुरानी एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ी कार्रवाई की है। रेगुलेटर ने कंपनी के कई उत्पादों पर बिक्री रोकने का आदेश जारी किया है। एफएसएसएआई का कहना है कि कंपनी अपने उत्पादों पर ‘100% Natural’, ‘100% Pure’, ‘100% Purity Guaranteed’ और ‘100% Organic’ जैसे दावे कर रही थी, जो उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं और FSS (Advertising and Claims) Regulations, 2018 का उल्लंघन करते हैं।
एफएसएसएआई ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह इन दावों का उपयोग तुरंत बंद करे और निर्धारित समयसीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करे। इस कार्रवाई के बाद संबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
एफएसएसएआई की कार्रवाई जिन उत्पादों पर लागू हुई है, उनमें
- डाबर हनी
- डाबर गाय का घी
- डाबर एप्पल साइडर विनेगर
- डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल
- डाबर तिल का तेल
- डाबर नारियल पानी
- डाबर कोकोनट मिल्क
- डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर
- डाबर ऑर्गेनिक हनी
शामिल हैं। नियामक का कहना है कि इन उत्पादों पर किए गए 100 प्रतिशत शुद्धता और ऑर्गेनिक होने के दावों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।
FSSAI has issued a Prohibition Order directing M/s Dabur India Limited to immediately cease the sale of food products carrying misleading "100%" claims.#FSSAINotice #FSSAIAction pic.twitter.com/7GdNRUJFyh
— FSSAI (@fssaiindia) August 3, 2026
एफएसएसएआई की इस कार्रवाई का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। मंगलवार को कारोबार शुरू होते ही डाबर इंडिया का शेयर करीब 5 प्रतिशत तक टूटकर लगभग 406 रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जो इसके 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब है। शेयर में गिरावट के साथ कंपनी का मार्केट कैप भी घटकर करीब 71,880 करोड़ रुपये रह गया।
डाबर इंडिया की स्थापना वर्ष 1884 में एस. के. बर्मन ने की थी। यह भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख उपभोक्ता उत्पाद कंपनियों में से एक है। कंपनी आयुर्वेदिक और हेल्थकेयर उत्पादों से लेकर खाद्य एवं पेय पदार्थों तक कई श्रेणियों में कारोबार करती है।
हालांकि, इस कार्रवाई का संबंध उत्पादों की गुणवत्ता या सुरक्षा से नहीं, बल्कि उनके लेबल और विज्ञापनों में किए गए ‘100 प्रतिशत’ शुद्धता और प्राकृतिक होने के दावों से है। एफएसएसएआई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां ऐसे दावे तभी करें, जब वे वैज्ञानिक और नियामकीय मानकों के अनुरूप पूरी तरह प्रमाणित हों।
