मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कुछ समय पहले तक जिस रूसी तेल को खरीदने वाले कम थे और उसके टैंकर समुद्र में खड़े रहते थे, वही तेल अब तेजी से मांग में आ गया है। कीमतों में भी बड़ा उछाल दर्ज किया गया है और रूसी कच्चा तेल अब 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है।
रूस पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कम मांग के कारण सस्ते दाम पर तेल बेचने को मजबूर था। उस समय इसकी कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे चली गई थी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं और वैश्विक बाजार में रूसी तेल की मांग फिर बढ़ने लगी है। हालांकि भारत को रूस अभी भी छूट के साथ कच्चा तेल उपलब्ध करा रहा है।
दरअसल ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। इस कारण खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में भारत समेत कई एशियाई देशों ने फिर से रूसी तेल की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।
इसी वजह से कई रूसी तेल टैंकरों ने अपनी दिशा बदलकर एशियाई देशों, खासकर भारत की ओर रुख कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार दो बड़े टैंकर, जो पहले पूर्वी एशिया की ओर जा रहे थे, अब भारत में तेल उतारने के लिए मुड़ गए हैं।
इस बदलाव के पीछे एक बड़ी वजह हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित बाधा की आशंका भी है। अगर इस अहम समुद्री मार्ग में तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो वैश्विक बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों टैंकरों में करीब 14 लाख बैरल रूसी “यूराल्स” ग्रेड का कच्चा तेल है, जो पहले भारतीय रिफाइनरियों के बीच काफी लोकप्रिय रहा है। अमेरिकी दबाव के कारण हाल के महीनों में भारत में रूसी तेल की आपूर्ति कुछ कम हुई थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की विशेष छूट दी है।
जहाजों की बात करें तो Odune नाम का सुएजमैक्स टैंकर लगभग 7.3 लाख बैरल तेल लेकर पारादीप पोर्ट (ओडिशा) पहुंच चुका है। वहीं Matari नाम का अफ्रामैक्स टैंकर 7 लाख बैरल से अधिक तेल के साथ वाडीनार पोर्ट (गुजरात) पहुंचने वाला है। इसके अलावा Indri नाम का एक और सुएजमैक्स टैंकर, जो पहले सिंगापुर जा रहा था, उसने अरब सागर में दिशा बदलकर भारत की ओर रुख कर लिया है।
केवल कच्चे तेल ही नहीं, बल्कि जेट फ्यूल के टैंकर भी अब यूरोप के बजाय एशियाई बाजारों की ओर मुड़ने लगे हैं। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार Navig8 Honor नाम का टैंकर, जो पश्चिमी बाजारों की ओर जा रहा था, अब दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर बढ़ रहा है। इस जहाज में करीब 75,000 टन यानी लगभग 5.9 लाख बैरल जेट फ्यूल मौजूद है।
ऊर्जा विश्लेषण कंपनी Vortexa के एशिया-प्रशांत विश्लेषण प्रमुख इवान मैथ्यूज का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में एशियाई बाजारों में ईंधन की मांग अधिक है। इसलिए भारत से जेट फ्यूल को यूरोप भेजने की तुलना में एशियाई देशों को निर्यात करना ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक तेल बाजार में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिसका असर कीमतों और आपूर्ति दोनों पर पड़ेगा।
