अमेरिका-ईरान शांति समझौते से इजरायल बेचैन, नेतन्याहू ने ट्रंप से मांगी तत्काल मुलाकात

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद इजरायल की चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जल्द मुलाकात के लिए समय मांगा है।

अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों के युद्ध को समाप्त करने के लिए हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस डील के पक्के होने के बाद से इजरायल के भीतर भारी छटपटाहट और नाराजगी देखी जा रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जल्द से जल्द मिलने का समय मांगा है। फिलहाल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जी-7 (G-7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस दौरे पर हैं। नेतन्याहू का कहना है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा के बेहद संवेदनशील और जरूरी मुद्दों को लेकर ट्रंप से आमने-सामने बात करना चाहते हैं। हालांकि, अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि नेतन्याहू इस मुलाकात के जरिए अमेरिका-ईरान समझौते में इजरायल का स्टैंड क्लियर करना चाहते हैं।

इस बीच इजरायल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए यहाँ तक कह दिया है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए इस समझौते को मानने के लिए इजरायल कतई प्रतिबद्ध नहीं है और अपनी संप्रभुता व राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर इजरायल भविष्य में भी स्वतंत्र रूप से फैसले लेता रहेगा।

लेबनान और हिजबुल्लाह के मोर्चे पर बात करेंगे नेतन्याहू

पर्दे के पीछे से आ रही खबरों के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच हस्ताक्षरित हो रहे इस शुरुआती समझौते में लेबनान के जमीनी मोर्चे का ज्यादा विस्तार से जिक्र नहीं किया गया है। इसके बावजूद इजरायल सरकार लेबनान में जारी अपने सैन्य ऑपरेशन और हमलों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप से विशेष चर्चा करना चाहती है। इजरायल का हमेशा से यह रुख रहा है कि लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह को ईरान का सीधा आर्थिक और सैन्य समर्थन मिलता है, और इसी वजह से इजरायल को अपनी आत्मरक्षा के लिए लेबनान की धरती पर सैन्य ऑपरेशन चलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

आखिर इजरायल को क्यों लगी मिर्ची?

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ यह है कि अमेरिका और ईरान ने लंबे समय के बाद इस बड़े समझौते का औपचारिक ऐलान किया है और आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के बीच फाइनल डील पर दस्तखत हो जाएंगे। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी बातचीत की प्रक्रिया में अमेरिका ने अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी इजरायल को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया था, इसी बात को लेकर नेतन्याहू सरकार को गहरी मिर्ची लग रही है। यही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल पर इस शांति डील में जानबूझकर अड़ंगा लगाने और देरी करवाने का गंभीर आरोप भी लगाया था। बताया जा रहा है कि बीते दिनों ट्रंप ने फोन पर बातचीत के दौरान नेतन्याहू को बुरी तरह झाड़ भी दिया था। ट्रंप ने मीडिया के सामने कहा था कि नेतन्याहू बेहद जटिल व्यक्ति हैं।

ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्था ‘एक्सियोस’ (Axios) से बातचीत में नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था, “इजरायल की हरकतों ने सब कुछ उलट-पुलट कर दिया। इसकी वजह से ऐतिहासिक हस्ताक्षर में कुछ घंटों की देरी हो गई। यह समझौता पहले ही होने वाला था, लेकिन अब इसे कुछ घंटों बाद के लिए पुनर्निर्धारित किया गया है।” राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘फॉक्स न्यूज’ को बताया कि ईरान के साथ इस शुरुआती शांति समझौते पर रविवार को इलेक्ट्रॉनिक रूप से (रिमोटली) हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जबकि दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने की फाइनल आधिकारिक डील एक हफ्ते बाद यूरोप में संपन्न होगी।

फोन पर नेतन्याहू पर बुरी तरह भड़क गए थे ट्रंप

इंटरव्यू के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि वह लगातार ईरान के शीर्ष वार्ताकारों के संपर्क में हैं ताकि उन्हें बेरूत में इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों का जवाबी सैन्य उत्तर देने से रोका जा सके और शांति बनी रहे। फॉक्स न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप इस कदर नाराज थे कि उन्होंने फोन पर सीधे इजरायली पीएम से कहा, ‘बीबी (नेतन्याहू), आप यह क्या बकवास कर रहे हैं?’

ट्रंप ने आगे बताया, “बीबी को उस समय बेरूत पर वह बकवास हमला करने की आखिर क्या जरूरत थी? मैं उस हमले से बेहद गुस्से में था और मैंने फोन पर अपनी यह नाराजगी उन्हें साफ-साफ़ शब्दों में बता दी। उनमें जरा भी कूटनीतिक समझदारी नहीं है।” उल्लेखनीय है कि इस हमले से ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल और ईरान दोनों को एक-दूसरे पर किसी भी तरह के नए हमले करने से सख्त परहेज करने की हिदायत दी थी, जिसका उल्लंघन होने पर महाशक्तियों के बीच का यह कूटनीतिक तनाव दुनिया के सामने खुलकर आ गया है।

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