मध्य पूर्व में महीनों से जारी भीषण तनाव और संघर्ष के बीच एक बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। अमेरिका की मध्यस्थता में वॉशिंगटन में हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद इजरायल और लेबनान बुधवार को युद्धविराम लागू करने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, दोनों देशों ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यह शांति समझौता तभी प्रभावी माना जाएगा जब ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह अपनी ओर से किए जाने वाले सभी हमलों और गोलीबारी को पूरी तरह बंद कर देगा। इस कूटनीतिक प्रगति की आधिकारिक जानकारी वार्ता के बाद जारी किए गए एक संयुक्त बयान में दी गई है।
संयुक्त बयान के अनुसार, इजरायल और लेबनान ने इस संघर्ष विराम को जमीन पर उतारने के लिए अपनी सहमति व्यक्त की है, लेकिन इसकी पूरी सफलता हिजबुल्लाह द्वारा सभी प्रकार की सैन्य गतिविधियों को रोकने पर टिकी है। हालांकि इजरायल और लेबनान के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, फिर भी पूरे क्षेत्र में स्थिरता और शांति स्थापित करने के उद्देश्य से दोनों पक्षों के बीच यह बातचीत मुकाम तक पहुंची है।
इस महत्वपूर्ण वार्ता के दौरान दोनों देशों ने सीमावर्ती और कुछ अन्य विशेष क्षेत्रों में “पायलट जोन” स्थापित करने का भी एक बड़ा फैसला लिया है। तय रणनीति के मुताबिक इन चिन्हित क्षेत्रों में केवल लेबनानी सशस्त्र बलों यानी वहां की सरकारी सेना का ही पूरा नियंत्रण रहेगा। इसके अलावा किसी भी गैर-राज्य सशस्त्र समूह या संगठन को इन क्षेत्रों में अपनी समानांतर गतिविधियां चलाने की कोई अनुमति नहीं होगी। संयुक्त बयान में साफ किया गया है कि इन विशिष्ट क्षेत्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी अब पूरी तरह लेबनान की सेना के हाथों में सौंप दी जाएगी।
यह समझौता इस शांति प्रक्रिया का अंतिम चरण नहीं है, बल्कि दोनों पक्ष आगामी 22 जून से शुरू होने वाले सप्ताह में एक बार फिर से विस्तृत बातचीत के लिए बैठक करेंगे। इस आगामी वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े कई अन्य पेचीदा मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य इजरायल और लेबनान के बीच एक व्यापक, व्यावहारिक और स्थायी समझौते तक पहुंचना है।
संयुक्त बयान में संप्रभुता का मुद्दा उठाते हुए सभी सहभागी देशों ने इस बात की पुष्टि की है कि इजरायल और लेबनान के आपसी संबंधों का भविष्य केवल दोनों देशों की संप्रभु सरकारें ही मिलकर तय करेंगी। इसके साथ ही बयान में यह कड़ा संदेश भी दिया गया कि किसी भी तीसरे देश या किसी गैर-राज्य संगठन को लेबनान के भविष्य को बंधक बनाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, जिसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ सीधे तौर पर ईरान और उसके सहयोगी संगठन हिजबुल्लाह की ओर एक बड़े कूटनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
यह उच्च स्तरीय वार्ता ऐसे समय में संपन्न हुई है जब कुछ ही दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी यह बड़ा दावा किया था कि इजरायल और लेबनान दोनों ने ही आपसी तनाव को कम करने के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर इतनी बड़ी बातचीत जारी रहने और युद्धविराम पर सहमति बनने के बावजूद जमीनी स्तर पर संघर्ष अभी पूरी तरह थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है।
इस ऐतिहासिक युद्धविराम समझौते की घोषणा के बीच भी दोनों ओर से हमलों का सिलसिला लगातार जारी रहा। बुधवार को ही हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के इलाकों पर कई मिसाइल हमले करने का दावा किया, जिससे सीमा पर अलर्ट की स्थिति बनी रही। दूसरी तरफ लेबनान सरकार का कहना है कि दक्षिणी लेबनान के क्षेत्रों में हुए इजरायली जवाबी हमलों में कम से कम नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें राहत और बचाव कार्य में जुटे दो पैरामेडिक कर्मी भी शामिल हैं। ऐसे में इस समझौते का जमीन पर पूरी तरह लागू होना आने वाले दिनों की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
