Iran-US Peace Talks Fail: पश्चिम एशिया में जारी खूनी संघर्ष को थामने की आखिरी उम्मीद को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चल रही ऐतिहासिक शांति वार्ता पूरी तरह विफल हो गई है। बातचीत में किसी सहमति पर न पहुंच पाने के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ वापस अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं। इस कूटनीतिक विफलता के बाद अब मिडिल ईस्ट में युद्ध का दायरा और अधिक बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
इस्लामाबाद टॉक फेल होने के बाद ईरान की ओर से बेहद तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ुल्फिकारी ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला क्योंकि ईरान किसी भी तरह के आत्मसमर्पण की शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी किसी भी पूर्व निर्धारित शर्त पर कोई समझौता नहीं करेगा। आईआरजीसी की ओर से आए इस बयान ने साफ कर दिया है कि ईरान अब कूटनीति के बजाय सैन्य संघर्ष के रास्ते पर ही आगे बढ़ेगा।
गौरतलब है कि शनिवार, 11 अप्रैल को इस्लामाबाद के सेरेना होटल में यह उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हुई थी। इसे 1979 की ईरानी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच पहली प्रत्यक्ष और सबसे बड़ी बातचीत के तौर पर देखा जा रहा था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अलग-अलग बैठकें भी की थीं। इस वार्ता का एकमात्र उद्देश्य क्षेत्र में जारी युद्ध को समाप्त कर एक स्थायी शांति समझौते तक पहुंचना था, लेकिन आपसी अविश्वास और कड़ी शर्तों के कारण यह प्रयास नाकाम रहा।
इस बैठक की संवेदनशीलता को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। पूरी राजधानी में रेड अलर्ट घोषित था और रेड जोन की सुरक्षा का जिम्मा सेना व रेंजर्स के हाथों में था। करीब 10,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के बावजूद यह हाई-प्रोफाइल मुलाकात किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। अब जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल खाली हाथ लौट चुका है, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इजराइल और ईरान के बीच सीधे टकराव की स्थिति और भी विकराल हो सकती है।
