Us Iran War: पिछले 26 दिनों से मिडिल ईस्ट में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच पहली बार शांति की ठोस उम्मीदें जगती नजर आ रही हैं। हालांकि युद्ध के मैदान में अभी हमले पूरी तरह नहीं थमे हैं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयानों और ईरान की ओर से आए सकारात्मक संदेशों ने वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने के संकेत दिए हैं। मंगलवार, 24 मार्च को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने खुलासा किया कि ईरान ने उन्हें एक “बेहद कीमती और बड़ा तोहफा” भेजा है, जो सीधे तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़ा है।
ट्रंप की 15-सूत्रीय शांति योजना
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए एक विस्तृत 15-सूत्रीय कार्ययोजना भेजी है। इजरायली मीडिया ‘चैनल 12’ के मुताबिक, इस प्रस्ताव में एक महीने के युद्धविराम का सुझाव दिया गया है। इस दौरान ईरान को अपना समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) सौंपना होगा और भविष्य में यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूर्ण प्रतिबंध स्वीकार करना होगा। इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे दशकों पुराने कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और उसे बुशहर में नागरिक परमाणु ऊर्जा विकसित करने में तकनीकी सहायता देने को तैयार है।
ईरान का बड़ा फैसला: होर्मुज से मिलेगा रास्ता
जवाब में ईरान ने भी एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) को जारी एक बयान में ईरान ने घोषणा की है कि वह ‘गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों’ को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति देगा। शर्त केवल इतनी है कि ये जहाज ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल या सहायक न हों। बता दें कि इस रास्ते के बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोहराम मचा हुआ था, जिसे अब ईरान की ओर से एक “सकारात्मक उपहार” के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर ईरान ने अभी तक अमेरिका के साथ सीधी बातचीत की पुष्टि नहीं की है।
वैश्विक बाजार में राहत: $90 के नीचे आया कच्चा तेल
शांति की इन खबरों का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है। बुधवार सुबह ब्रेंट क्रूड वायदा में 7% की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 97.18 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। वहीं, अमेरिकी क्रूड (WTI) भी 6% से अधिक टूटकर 86.72 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। पिछले हफ्ते ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर के पार चला गया था, लेकिन अब इसमें 10% से अधिक की सुधार देखी जा रही है।
भारत के लिए क्या हैं मायने?
कच्चे तेल की कीमतों में आई यह नरमी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, तेल के दाम गिरने से भारत के चालू खाता घाटा (CAD) और मुद्रास्फीति (महंगाई) पर दबाव कम होगा। पिछले कुछ दिनों से भारत में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर जो अफवाहें और पैनिक देखा जा रहा था, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के स्थिर होने से उन चिंताओं पर भी विराम लगने की उम्मीद है।
