तेहरान: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने के लिए कानून बनाने की तैयारी कर रहा है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों ‘फार्स’ और ‘तस्नीम’ के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, ईरानी संसद एक ऐसा मसौदा तैयार कर रही है जो अधिकारियों को इस जलमार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों और टैंकरों से शुल्क लेने की अनुमति देगा।
ईरानी संसद की नागरिक मामलों की समिति के अध्यक्ष ने इस योजना की पुष्टि करते हुए कहा कि इसका प्रस्ताव तैयार है और जल्द ही कानूनी टीम इसे अंतिम रूप देगी। अधिकारी का तर्क है कि ईरान इस क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, इसलिए जहाजों से सुरक्षा शुल्क वसूलना पूरी तरह से स्वाभाविक है। उन्होंने इसकी तुलना अन्य अंतरराष्ट्रीय गलियारों (corridors) से की, जहाँ से माल गुजरने पर संबंधित देश शुल्क लेते हैं।
75 अरब डॉलर का है बड़ा गेमप्लान
ग्लोबल शिपिंग पर नजर रखने वाली एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान इस टोल के जरिए करीब 75 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रहा है। दावा किया गया है कि कुछ जहाजों से पहले ही शुल्क के तौर पर 2 मिलियन डॉलर तक वसूले जा चुके हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा (कच्चा तेल और एलएनजी) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती है।
भारत और मित्र देशों को मिलेगी राहत
होर्मुज मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे दक्षिण एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हालांकि, इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक राहत भरी घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान के मित्र देशों—जैसे भारत, चीन, पाकिस्तान, रूस और इराक—के जहाजों के लिए होर्मुज में कोई रुकावट पैदा नहीं की जाएगी और उनके लिए यह रास्ता सुचारू रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम न केवल आर्थिक लाभ के लिए है, बल्कि इसके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री राजनीति में अपनी पकड़ और भी मजबूत करना चाहता है। यदि यह कानून लागू होता है, तो भविष्य में वैश्विक तेल कीमतों और शिपिंग लागत पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
