वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरानी सीमा में घुसकर अपने लड़ाकू विमान के पायलट को रेस्क्यू किया। इस ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया और सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कड़ी चेतावनी जारी की।
ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को समुद्री यातायात के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमले किए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जलमार्ग नहीं खोला गया तो ईरान को “नरक” बना दिया जाएगा। यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी सशस्त्र बलों ने ईरान के भीतर मार गिराए गए लड़ाकू विमान के लापता क्रू सदस्य को बचाने के लिए अभियान चलाया था।
अपनों ने ही किया विरोध
ट्रंप के इस बयान पर अमेरिकी राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। रिपब्लिकन नेता और पूर्व सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने कहा कि राष्ट्रपति “पागल हो गए हैं”। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ट्रंप के प्रशासन में जो लोग खुद को ईसाई बताते हैं, उन्हें ईश्वर से माफी मांगनी चाहिए और इस “पागलपन” में हस्तक्षेप करना चाहिए।
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता टिम केन ने इस बयानबाजी को “शर्मनाक और बचकाना” करार दिया। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस को ऐसी भाषा से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पायलटों जैसे लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।
वहीं डेमोक्रेटिक सांसद बेका बालिंट ने इसे “घृणित” बताया। सीनेट के वरिष्ठ नेता चक शूमर ने ट्रंप को “संतुलन खो चुका पागल व्यक्ति” तक कह दिया।
25वें संशोधन की उठी मांग
डेमोक्रेटिक नेता क्रिस मर्फी ने कहा कि अगर वह ट्रंप के मंत्रिमंडल में होते तो ईस्टर के दिन ही 25वें संशोधन को लेकर संवैधानिक वकीलों से बात करते। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह मानसिक संतुलन खोने जैसी स्थिति है और इससे बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।
गौरतलब है कि अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन मंत्रिमंडल को यह अधिकार देता है कि वह राष्ट्रपति को उनके कर्तव्यों का निर्वहन करने में अक्षम घोषित कर पद से हटा सके।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अमेरिका में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और ट्रंप के बयान को लेकर देश के भीतर ही तीखी बहस छिड़ गई है।
