ईरान युद्ध पर अमेरिका से नाराज हुए खाड़ी देश: बिना सूचना हमले और सुरक्षा में लापरवाही के लगाए गंभीर आरोप

US-Israel-Iran War: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा छेड़ी गई जंग अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनावपूर्ण होती जा रही है। अमेरिका के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले खाड़ी सहयोगी देशों ने युद्ध के प्रबंधन को लेकर अपनी गहरी नाराजगी और निराशा व्यक्त की है।

ईरान युद्ध पर अमेरिका से नाराज हुए खाड़ी देश: बिना सूचना हमले और सुरक्षा में लापरवाही के लगाए गंभीर आरोप
ईरान युद्ध पर अमेरिका से नाराज हुए खाड़ी देश: बिना सूचना हमले और सुरक्षा में लापरवाही के लगाए गंभीर आरोप

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अब खाड़ी क्षेत्र की राजनीति को भी असहज स्थिति में ला दिया है। जंग शुरू होने के बाद अमेरिका के कई खाड़ी सहयोगी देशों में नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर होने वाले शुरुआती हमलों की जानकारी पहले से साझा नहीं की, जिसके कारण वे संभावित पलटवार से निपटने की पर्याप्त तैयारी नहीं कर सके।

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक दो खाड़ी देशों के अधिकारियों ने कहा कि उनकी सरकारें युद्ध को संभालने के अमेरिकी तरीके से निराश हैं। खास तौर पर 28 फरवरी को ईरान पर हुए शुरुआती हमले को लेकर उन्हें पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि यदि पहले से जानकारी दी जाती तो क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने का समय मिल सकता था।

खाड़ी देशों की एक और शिकायत यह भी है कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि इस तरह का सैन्य टकराव पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है, लेकिन उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर दिया गया। एक अधिकारी के अनुसार खाड़ी देशों को ऐसा लग रहा है कि सैन्य कार्रवाई का मुख्य फोकस इजरायल और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा पर रहा, जबकि क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा के लिए काफी हद तक खुद पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इन देशों को यह भी चिंता है कि ईरानी हमलों को रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले इंटरसेप्टर तेजी से खत्म हो रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि ईरान के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों से खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा दबाव बढ़ गया है। जिन देशों के अधिकारियों ने यह जानकारी दी, उन्होंने संवेदनशील राजनयिक मुद्दे का हवाला देते हुए अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बात की। इस मामले पर बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की सरकारों से संपर्क किया गया, लेकिन आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

हालांकि खाड़ी क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका और इजरायल की आलोचना की है। प्रिंस तुर्की अल‑फैसल, जो सऊदी अरब के पूर्व खुफिया प्रमुख रह चुके हैं, ने कहा कि यह मूल रूप से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की जंग है और उन्होंने किसी तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने पक्ष में कर लिया।

उधर अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के अधिकारियों ने भी सांसदों को दी गई एक बंद कमरे की ब्रीफिंग में स्वीकार किया है कि ईरान द्वारा भेजे जा रहे ड्रोन हमलों की लगातार लहरों को रोकना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इससे खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

आंकड़ों के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाते हुए सैकड़ों मिसाइलें और बड़ी संख्या में ड्रोन दागे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक करीब 380 मिसाइलें और 1,480 से ज्यादा ड्रोन हमले किए जा चुके हैं। इन हमलों में कई लोगों की मौत भी हुई है। हाल ही में कुवैत सिटी के पास एक नागरिक बंदरगाह में स्थित ऑपरेशन सेंटर पर हुए ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत होने की खबर भी सामने आई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव लंबा चलता है तो इसका असर न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा पर बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

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