इस्लामाबाद: पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और शिया धर्मगुरुओं के बीच हुई हालिया मुलाकात ने देश के भीतर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को इस्लामाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रमुख शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी ने इस बैठक के भीतर की कड़वाहट का खुलासा किया। नजफी के अनुसार, 19 मार्च को रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में हुई चर्चा के दौरान आसिम मुनीर ने शिया समुदाय के प्रति सख्त रवैया अपनाते हुए उन्हें ‘ईरान चले जाने’ तक की बात कह दी।
अल्लामा आगा शिफा नजफी ने बताया कि बैठक की शुरुआत में ही फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद इस्लामाबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान में हुए प्रदर्शनों को लेकर बेहद गुस्से में थे। मुनीर ने विशेष रूप से गिलगित-बाल्टिस्तान में सैन्य संपत्तियों को पहुंचाए गए नुकसान पर नाराजगी जताते हुए इसे ‘बर्दाश्त के बाहर’ बताया। नजफी के अनुसार, बातचीत के दौरान जब शिया समुदाय की वफादारी और उनके धार्मिक जुड़ाव पर सवाल उठे, तो आसिम मुनीर ने दोटूक शब्दों में कहा, “अगर आपको ईरान से इतनी ही मोहब्बत है, तो आप ईरान चले जाओ।”
इस अपमानजनक टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए अल्लामा आगा शिफा नजफी ने फील्ड मार्शल को याद दिलाया कि पाकिस्तान की फौज में कई शिया अधिकारी सेवा दे रहे हैं। उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके मामा अमीर हयात को ‘सितारा-ए-जुर्रत’ से नवाजा गया था और उनके परिवार के अन्य सदस्य भी सेना में सक्रिय हैं। नजफी ने सवाल उठाया कि जिन उग्रवादी समूहों ने सैनिकों के सिर काटकर उनके साथ फुटबॉल खेला या सिटिंग जनरल की हत्या की, उनसे कभी ‘अफगानिस्तान चले जाने’ को नहीं कहा गया, लेकिन आज शांतिपूर्ण शिया समुदाय को देश छोड़ने की नसीहत दी जा रही है। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या कभी किसी शिया नागरिक ने किसी सैनिक की जान ली है।
बैठक के दौरान आसिम मुनीर ने क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति पर पाकिस्तान का रुख भी स्पष्ट किया। मुनीर ने शिया धर्मगुरुओं को बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ एक औपचारिक रक्षा समझौता है। ईरान द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे हमलों का जिक्र करते हुए मुनीर ने चेतावनी दी कि यदि ईरान अपनी कार्रवाई जारी रखता है, तो पाकिस्तान को सऊदी अरब की रक्षा के लिए युद्ध के मैदान में उतरना पड़ेगा। अल्लामा आगा शिफा नजफी के इन खुलासों ने पाकिस्तान के भीतर सांप्रदायिक तनाव और सेना व अल्पसंख्यकों के बीच बढ़ते अविश्वास को एक बार फिर सतह पर ला दिया है।
