काठमांडू: नेपाल की राजनीति में इस वक्त एक ऐसा तूफान आया है जिसने दशकों पुराने राजनीतिक किलों को ढहा दिया है। ‘जनता के रैपर’ और सिविल इंजीनियर से राजनेता बने बालेन शाह ने 27 मार्च 2026 को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और सत्ता संभालते ही महज 48 घंटों के भीतर ऐसे कड़े फैसले लिए हैं, जिनकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। उनकी पार्टी, ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ ने 275 सदस्यीय संसद में 182 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जो सितंबर 2025 के ‘Gen-Z आंदोलन’ के बाद युवाओं के गुस्से और उम्मीदों का परिणाम है।
शपथ से पहले ‘जय महाकाली’ रैप और फिर एक्शन
बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले “जय महाकाली” शीर्षक से एक रैप सॉन्ग रिलीज किया, जिसमें उन्होंने नेपाल की एक ‘नई सुबह’ का आह्वान किया था। शपथ लेने के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई और चार ऐसे बड़े फैसले लिए जिन्होंने पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
1. पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी
बालेन शाह का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला Gen-Z आंदोलन के दौरान मारे गए 76 युवाओं को न्याय दिलाना रहा। गौरी बहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट के आधार पर, जिसमें आंदोलन के दमन और फायरिंग के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया था, बालेन ने कैबिनेट से मंजूरी ली। इसके बाद 28 मार्च की शाम तक पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। लोग इस कार्रवाई की तुलना फिल्मी पटकथा ‘नायक’ से कर रहे हैं।
2. शहीद परिवारों को सरकारी नौकरियां
आंदोलन में जान गंवाने वाले 27 छात्र शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रधानमंत्री ने उन्हें तुरंत सरकारी नौकरी देने का आदेश दिया है। बालेन ने भावुक होते हुए कहा कि यह केवल रोजगार नहीं, बल्कि उन युवाओं का कर्ज है जिन्होंने नए नेपाल की नींव रखने के लिए अपना बलिदान दिया।
3. 100 दिनों का गवर्नेंस और पारदर्शिता प्लान
प्रशासनिक सुधारों को गति देने के लिए बालेन ने ‘100 डेज गवर्नेंस रिफॉर्म प्लान’ पेश किया है। उन्होंने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि 100 दिनों के भीतर जमीन पर ठोस बदलाव दिखने चाहिए। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शिक्षा मंत्री को सरकार का आधिकारिक प्रवक्ता भी नियुक्त किया गया है ताकि जनता तक हर फैसले की सटीक जानकारी पहुंचे।
4. शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव
शिक्षा को राजनीति की गुलामी से मुक्त करने के लिए बालेन ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक छात्र संगठनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही, पांचवीं कक्षा तक की बोर्ड परीक्षाओं को समाप्त कर दिया गया है। एक और महत्वपूर्ण आदेश के तहत विदेशी नाम वाले स्कूलों को अपना नाम बदलकर नेपाली या स्थानीय आदिवासी नामों पर रखने का निर्देश दिया गया है।
भारत के साथ रिश्तों पर संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई बधाई का जवाब देते हुए बालेन शाह ने भारत और नेपाल के बीच समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि बालेन घरेलू सफाई के साथ-साथ पड़ोसी देशों के साथ मजबूत और संतुलित रिश्तों को प्राथमिकता देंगे। काठमांडू की सड़कों पर इस वक्त ‘बालेन भाइया’ के नारे गूंज रहे हैं और लोगों में एक नई उम्मीद जगी है कि पुराने दौर की राजनीति का अंत हो चुका है।
