PoK में पाकिस्तान के खिलाफ गूंजा विद्रोह, इन्फ्लुएंसर रनिमा शाजमा ने दिया भारत का साथ देने का संदेश

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में गुरुवार को लगातार 16वें दिन भी प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शनकारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं। रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठे हैं, जहां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की आजादी की मांग उठाई जा रही है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी हुकूमत और सेना की दमनकारी नीतियों के खिलाफ जनता का ऐतिहासिक विद्रोह 16वें दिन भी जारी है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड पर 50 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं और पाकिस्तान के कब्जे से आजादी की मांग बुलंद कर रहे हैं। इस विद्रोह के बीच PoK की महिलाएं अब कश्मीर को लुटेरे पाकिस्तान से अलग करके हिंदुस्तान से हाथ मिलाने की खुलेआम अपील कर रही हैं।

PoK की मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रनिमा शाजमा ने एक वीडियो पोस्ट कर पाकिस्तानी सेना की बर्बरता को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पाकिस्तानी सेना लोगों के घरों को लूट रही है और नागरिकों को निशाना बना रही है, उसे देखते हुए बेहतर यही है कि PoK के लोग हिंदुस्तान से हाथ मिला लें। रनिमा ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान कभी भी PoK के साथ नहीं था और ना ही कभी रहेगा।

सेना कश्मीर छोड़े, कश्मीरी और हिंदुस्तान खुद तय करेंगे अपना भविष्य

पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही अवामी एक्शन कमेटी के सदस्य सरदार अमान खान ने 50 हजार लोगों के जनसैलाब के सामने पाकिस्तानी सेना को सीधा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना तत्काल कश्मीर छोड़ दे क्योंकि वे कश्मीर के लिए कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने मांग की कि कश्मीर कश्मीरियों को सौंप दिया जाए, इसके बाद कश्मीरी जानें और हिंदुस्तान जाने। अमान खान ने पाकिस्तानी हुकूमत को चेतावनी देते हुए कहा कि PoK की जनता को वे 12 विधायक बिल्कुल नहीं चाहिए जिन्हें पाकिस्तानी हुकूमत और आईएसआई (ISI) शरणार्थी सीटों के नाम पर बैठाती है, और ना ही उन्हें बचे हुए वे 41 विधायक चाहिए जिन्हें धांधली के जरिए चुनवाया जाता है।

भूख से मारने की साजिश और कर्मचारियों की बर्खास्तगी

इस विद्रोह को कुचलने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत और सेना बेहद घिनौनी साजिश रच रही है। प्रदर्शन खत्म कराने के लिए PoK में खाने-पीने के सामान की भारी किल्लत पैदा करने की कोशिश की जा रही है। पाकिस्तान-PoK बॉर्डर पर पिछले 10 दिनों से खाने के सामान से लदे ट्रक खड़े हैं, जिन्हें पाकिस्तानी सेना PoK की सीमा में घुसने नहीं दे रही है। इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। सेना की इस हरकत के बाद लोग पाकिस्तान के उस खोखले दावे की पोल खोल रहे हैं जिसमें वह कश्मीर को अपनी ‘शह-रग’ कहता था।

पिछले 16 दिनों से पूरा PoK पूरी तरह बंद है और लोग घरों से निकलकर रावलकोट में धरने पर बैठे हैं। फैजल मुमताज राठौड़ वाली PoK की कठपुतली सरकार ने इस विद्रोह में शामिल होने के आरोप में आज एक साथ 128 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। सरकार ने रिटायर्ड सैनिकों को भी खुलेआम धमकी दी है कि यदि वे धरने में शामिल दिखाई दिए तो उनकी मिलने वाली पेंशन तुरंत खत्म कर दी जाएगी।

58 लोगों की मौत, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की बौखलाहट

पाकिस्तानी सेना इस आंदोलन को दबाने के लिए अब तक 58 लोगों को मौत के घाट उतार चुकी है। हुकूमत ने प्रदर्शन के आयोजकों और संगठनों को आतंकी घोषित कर दिया है, साथ ही आंदोलन की मदद करने वाले 150 लोगों को भी आतंकी करार दिया गया है। इसके बावजूद जनता का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में बौखलाहट भरा बयान देते हुए कहा कि वे रावलकोट के लोगों को कश्मीरी नहीं मानते, क्योंकि कश्मीर में पैदा होना कश्मीरी होने का सबूत नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि ये लोग कश्मीरी बोलते भी नहीं हैं। रक्षा मंत्री ने संसद में अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि PoK के लिए हमने 5 जंगें लड़ी हैं, लेकिन उसके बदले में पाकिस्तान को वहां सिर्फ गालियां और धरने मिलते हैं, जो उन्हें कतई बर्दाश्त नहीं है।

अवैध कब्जे के इतिहास का खुला सच

उल्लेखनीय है कि साल 1948 में जम्मू कश्मीर के हिस्सों पर अवैध कब्जा करने के बाद पाकिस्तान ने अपनी सत्ता कायम रखने के लिए मीरपुर, रावलकोट और मुजफ्फरराबाद जैसे इलाकों में जानबूझकर पंजाबी और उर्दू जुबान वाले लोगों को बसाया था। 9 जून से शुरू हुए इस प्रचंड विद्रोह को खारिज करने की कोशिश में ही सही, लेकिन पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने संसद में खुद अपने देश के हुक्मरानों द्वारा अतीत में किए गए पापों को दुनिया के सामने ला दिया है। अब देखना यह होगा कि 9 जून से धधक रही यह विद्रोह की आग क्या साल 1971 के इतिहास को दोहराते हुए इस इलाके को पाकिस्तान के कब्जे से मुक्त कराएगी, या फिर हर बार की तरह इस बार भी पाकिस्तानी सेना गोली के दम पर PoK के नागरिकों की आवाज को दबा देगी।

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