सिवान: कर्तव्य की वेदी पर प्राण न्यौछावर करने वाले जांबाज एसटीएफ (STF) जवान श्रीराम कुमार यादव का अंतिम संस्कार मंगलवार की शाम पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव पुरैना में किया गया। पूर्वी चंपारण के चकिया में कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए श्रीराम यादव की अंतिम विदाई में जनसैलाब उमड़ पड़ा। ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों के बीच 4 वर्षीय मासूम पुत्र अंश राज ने जब अपने पिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं।
अंतिम बातचीत: “रेड पर जा रहा हूँ…”
शहीद की पत्नी सिंधू देवी ने बिलखते हुए बताया कि सोमवार की रात 10 बजे उनकी श्रीराम से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने बस इतना कहा था कि “एक रेड पर जा रहा हूँ”। किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। इसके कुछ ही घंटों बाद रात ढाई बजे मुठभेड़ के दौरान वे वीरगति को प्राप्त हुए। जैसे ही मंगलवार दोपहर उनका पार्थिव शरीर गांव पहुँचा, कोहराम मच गया। पत्नी बेसुध होकर गिर पड़ीं, वहीं 5 साल की बेटी और 4 साल का बेटा पिता के पार्थिव शरीर से लिपटकर रोने लगे, जिसे देख पूरा गांव दहाड़ मारकर रो पड़ा।
तिरंगा यात्रा के साथ वीर सपूत का स्वागत
शहीद जवान के सम्मान में युवाओं का जोश देखते ही बनता था। जैसे ही पार्थिव शरीर के आने की सूचना मिली, सिवान-थावे मुख्य मार्ग स्थित सरसर बाजार के पास हजारों युवाओं की टोली तिरंगा लेकर बाइक के साथ आगे-आगे चलने लगी। सारण रेंज के डीआईजी निलेश कुमार, जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय और पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को नमन किया। अंतिम संस्कार से पूर्व एसटीएफ के जवानों ने 36 राउंड फायरिंग कर अपने साथी को आखिरी सलामी दी।
2014 में शुरू हुआ था वर्दी का सफर
श्रीराम कुमार यादव तीन भाइयों में मंझले थे। साल 2014 में बिहार पुलिस में बहाल हुए श्रीराम पहले बीएमपी (BMP) में थे और बाद में कठिन ट्रेनिंग पूरी कर एसटीएफ में शामिल हुए थे। उनके छोटे भाई ने भी भाई के पदचिन्हों पर चलते हुए 2025 में बिहार पुलिस जॉइन की है और वर्तमान में रोहतास में ट्रेनिंग ले रहे हैं। शहीद की शादी 2018 में हुई थी और वे अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार और वीरता की एक ऐसी कहानी छोड़ गए हैं, जिस पर पूरे बिहार को गर्व है।
