Gwalior Weather Update: मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही ग्वालियर और चंबल संभाग में मौसम के तेवर तल्ख हो गए हैं। शहर में सूरज की तपिश और गर्म हवाओं ने लोगों को समय से पहले ही भीषण गर्मी का अहसास कराना शुरू कर दिया है। गुरुवार को ग्वालियर का अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से 5.4 डिग्री अधिक है। शुक्रवार को भी गर्मी का असर कम नहीं हुआ और न्यूनतम तापमान 18.1 डिग्री सेल्सियस रहने के कारण रातें भी गर्म महसूस होने लगी हैं।
कृषि पर बढ़ता खतरा: दानों के विकास पर असर
तापमान में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञ शैलेंद्र सिंह कुशवाह के अनुसार, जिले के जिन हिस्सों में गेहूं की बुवाई देरी से हुई थी, वहां फसल फिलहाल ‘दुग्धिया अवस्था’ (Milking stage) में है। कुछ क्षेत्रों में बालियां निकल रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा और गर्म हवाएं चलीं, तो गेहूं के दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाएंगे। दाने पतले और छोटे रह जाने के कारण पैदावार में कमी आ सकती है।
किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह
बढ़ते पारे के प्रतिकूल प्रभाव से फसल को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को नियमित सिंचाई करने की सलाह दी है। खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने से मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे दानों के विकास में मदद मिलती है। किसानों से फसल की निरंतर निगरानी करने को भी कहा गया है।
क्यों बदल रहा है मौसम का मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर सक्रिय उपोष्ण जेट स्ट्रीम हवाओं और अफगानिस्तान के पास बने नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवाओं का रुख बदल गया है। उत्तर से आने वाली ठंडी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं और राजस्थान की ओर से आने वाली गर्म एवं शुष्क हवाओं ने मध्य भारत का रुख कर लिया है। इसके अलावा, उत्तर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ऊपर बने चक्रवाती घेरे और उत्तर प्रदेश से ओडिशा तक फैली ट्रफ लाइन ने भी गर्मी बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ सकता है, जिससे लू (Hit wave) जैसी स्थिति समय से पहले बन सकती है।
