पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बेहद कड़वा अनुभव पेश किया है। राज्य में सत्ता परिवर्तन की लहर के बीच ममता बनर्जी को अपनी सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली पारंपरिक सीट ‘भवानीपुर’ में भी करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने एक बार फिर ममता बनर्जी को चुनावी मैदान में पटकनी देते हुए उन्हें 15,114 वोटों के अंतर से हरा दिया है। यह लगातार दूसरी बार है जब शुभेंदु ने सीधे मुकाबले में ममता बनर्जी को मात दी है; इससे पहले 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर उन्हें हराया था।
शुभेंदु अधिकारी ने इस जीत को बंगाल की जनता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जीत बताया है। अपनी जीत के बाद तीखा हमला बोलते हुए शुभेंदु ने कहा कि ममता बनर्जी का राजनीतिक संन्यास अब तय हो गया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को मुख्य रूप से एक विशेष समुदाय का समर्थन मिला, जबकि उन्हें हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध समुदायों ने अपना आशीर्वाद दिया। शुभेंदु ने विशेष रूप से बंगाली हिंदुओं, गुजरातियों, मारवाड़ियों और सिखों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनके पक्ष में खुलकर मतदान किया।
इस चुनावी मुकाबले की एक और दिलचस्प बात शुभेंदु द्वारा सीपीएम (CPM) के समर्थकों का आभार जताना रही। शुभेंदु ने दावा किया कि भवानीपुर में सीपीएम के लगभग 13,000 वोटर्स में से 10,000 ने भाजपा को वोट दिया, जिससे उनकी जीत का रास्ता साफ हुआ। उन्होंने बताया कि मतगणना के 15वें राउंड तक जैसे ही उन्होंने ममता बनर्जी की बढ़त को खत्म कर 556 वोटों की लीड बनाई, मुख्यमंत्री ने वहां से जाना शुरू कर दिया था।
भवानीपुर सीट ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और भरोसेमंद रही है। वह दक्षिण कोलकाता लोकसभा सीट से छह बार सांसद रह चुकी हैं और भवानीपुर उसी का एक हिस्सा है। 2021 में नंदीग्राम से हारने के बाद उन्होंने भवानीपुर उपचुनाव में 58,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी, लेकिन 2026 के आम चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने उनके इस अभेद्य किले में सेंध लगा दी है। राज्य में भाजपा की प्रचंड जीत और खुद की हार के बाद ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य को लेकर अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
