नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत पर देश की जानी-मानी लेखिका और स्तंभकार शोभा डे ने अपनी बेबाक राय साझा की है। उन्होंने भाजपा की इस सफलता को केवल एक राजनीतिक दल की जीत न मानकर पूरे बंगाल और विशेष रूप से वहां की महिलाओं की जीत करार दिया है। शोभा डे के अनुसार, बंगाल की जनता ने बदलाव के संकल्प के साथ मतदान किया और एक नए युग की शुरुआत की है।
ममता बनर्जी की हार पर तीखा प्रहार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की शिकस्त पर टिप्पणी करते हुए शोभा डे ने कहा कि बंगाल की महिलाओं ने ही उन्हें हार का स्वाद चखाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले शासन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान जैसे बुनियादी मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। शोभा डे के मुताबिक, “ममता बनर्जी को राज्य की महिलाओं की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं था। इसी लापरवाही और कुशासन का नतीजा है कि आज उन्हें सत्ता से बाहर होना पड़ा है।”
बंगाल में विकास की नई उम्मीद
राज्य में पहली बार ‘कमल खिलने’ पर खुशी जाहिर करते हुए शोभा डे ने उम्मीद जताई कि भाजपा अब बंगाल की कमान किसी कुशल और सक्षम नेतृत्व को सौंपेगी। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से बंगाल में विकास की नई लहर देखने को मिलेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब बंगाल में किसी एक व्यक्ति की तानाशाही नहीं चलेगी, बल्कि जनता की आवाज सुनी जाएगी और ‘लोगों की सरकार’ काम करेगी।
कौन हैं शोभा डे?
7 जनवरी 1948 को जन्मी शोभा डे भारतीय अंग्रेजी साहित्य और पत्रकारिता जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक मॉडल के रूप में की थी, लेकिन बाद में ‘स्टारडस्ट’ और ‘सोसाइटी’ जैसी पत्रिकाओं के संपादन के जरिए उन्होंने भारतीय मनोरंजन पत्रकारिता को एक नई पहचान दी। उन्हें अक्सर “भारत की जैकी कॉलिन्स” कहा जाता है। उनके उपन्यास, जैसे ‘सोशलइट इवनिंग्स’ और ‘स्टारी नाइट्स’, शहरी उच्च वर्ग की जीवनशैली और मानवीय रिश्तों के साहसी चित्रण के लिए जाने जाते हैं। अपने बेबाक लेखन के लिए मशहूर शोभा डे का यह बयान बंगाल की बदलती राजनीति में एक महत्वपूर्ण सामाजिक दृष्टिकोण पेश करता है।
